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RTE से पहले नियुक्त शिक्षकों की TET अनिवार्यता के खिलाफ पोस्टकार्ड और ई-मेल मुहिम तेज, देखें पोस्टकार्ड और ई-मेल भेजने के पते।

Sir Ji Ki Pathshala

नई दिल्ली/लखनऊ: Right of Children to Free and Compulsory Education Act (RTE Act) लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों और शिक्षा मित्रों को TET (Teacher Eligibility Test) की अनिवार्यता से छूट दिलाने की मांग को लेकर देशभर में आवाज तेज हो गई है। इस मुद्दे पर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ ने एक अभियान शुरू करते हुए सरकार और संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों तक अपनी मांग पहुंचाने की पहल की है।

महासंघ का कहना है कि RTE अधिनियम लागू होने से पहले से सेवा दे रहे शिक्षकों को अब शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्य करना उनके अधिकारों और सेवा शर्तों के साथ न्याय नहीं है।

अनुभवी शिक्षकों के हितों की रक्षा की मांग

महासंघ के पदाधिकारियों का तर्क है कि हजारों शिक्षक वर्षों से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दे रहे हैं। ऐसे में उनके लंबे अनुभव को नजरअंदाज कर परीक्षा की बाध्यता थोपना उचित नहीं है।

संगठन का कहना है कि इन शिक्षकों को सेवा सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए तथा उन्हें TET की अनिवार्यता से मुक्त किया जाना चाहिए।

सरकार तक पहुंचाई जा रही मांग

इस अभियान के तहत शिक्षक, शिक्षा मित्र और अनुदेशक देश के शीर्ष पदों पर बैठे नेताओं और अधिकारियों को पोस्टकार्ड और ई-मेल भेजकर अपनी मांग रख रहे हैं। महासंघ ने सभी प्रभावित शिक्षकों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की है।

इन पदों पर भेजे जा रहे हैं ई-मेल

पद ई-मेल
राष्ट्रपति (भारत) presidentofindia@rb.nic.in, us.petitions@rb.nic.in
प्रधानमंत्री (भारत) connect@mygov.nic.in
मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट supremecourt@nic.in
नेता प्रतिपक्ष rahulgandhi@mpls.sansad.in
मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश cmup@nic.in, yogiadityanath72@gmail.com

शिक्षकों से एकजुट होने की अपील

महासंघ ने अपने संदेश में कहा है कि शिक्षा व्यवस्था और अपनी सेवा शर्तों की रक्षा के लिए सभी शिक्षकों को एकजुट होकर इस अभियान को मजबूत बनाना होगा। संगठन का दावा है कि यदि यह आंदोलन लगातार जारी रहा तो TET की बाध्यता से राहत मिल सकती है।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि RTE अधिनियम लागू होने के बाद शिक्षकों के लिए TET पास करना अनिवार्य कर दिया गया था। लेकिन इससे पहले नियुक्त शिक्षकों का कहना है कि उनकी नियुक्ति उस समय की नियमावली के अनुसार हुई थी, इसलिए उन पर बाद में लागू नियमों को लागू करना न्यायसंगत नहीं है।

यह मुद्दा हजारों शिक्षकों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार और न्यायपालिका इस मांग पर क्या निर्णय लेती है और क्या पुराने अनुभवी शिक्षकों को TET अनिवार्यता से राहत मिल पाती है या नहीं।

RTE से पहले नियुक्त शिक्षकों का विरोध तेज, TET अनिवार्यता खत्म करने की उठी मांग


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