लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के लिए पिछला सप्ताह अत्यंत पीड़ादायक रहा। जनपद के दो अलग-अलग क्षेत्रों से आई हृदयविदारक खबरों ने शिक्षा जगत को झकझोर कर रख दिया है। एक ओर जहाँ बीमारी और अवसाद के चलते एक कर्मठ शिक्षक ने दम तोड़ दिया, वहीं दूसरी ओर कथित मानसिक उत्पीड़न और तनाव के चलते एक महिला शिक्षामित्र ने दुनिया को अलविदा कह दिया। इन घटनाओं ने न केवल विभाग की रिक्तियों को बढ़ाया है, बल्कि शिक्षामित्रों के जीवन में व्याप्त अनिश्चितता और मानसिक दबाव के गंभीर प्रश्न भी खड़े कर दिए हैं।
बीईओ देवेश राय ने पेश की मानवता की मिसाल, मृतक परिवार को दी ₹56,000 की मदद
बेहजम ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले कंपोजिट विद्यालय टेड़वा में तैनात शिक्षामित्र ज्ञानेश शुक्ला का बीते 24 फरवरी को ब्रेन हेमरेज के कारण निधन हो गया था। बताया जा रहा है कि समायोजन निरस्त होने के बाद से ज्ञानेश गहरे अवसाद में थे, जिसका असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ा। उनके सरल और मृदुभाषी स्वभाव के कारण पूरा ब्लॉक उन्हें सम्मान की दृष्टि से देखता था।
इस दुःख की घड़ी में मानवता का परिचय देते हुए खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) देवेश राय और विद्यालय के समस्त स्टाफ ने स्वेच्छा से धनराशि एकत्रित की। गौरव शुक्ला के साथ मृतक के निवास पर पहुंचकर अधिकारियों ने उनकी पत्नी को ₹56,000 की आर्थिक सहायता सौंपी। बीईओ ने परिवार को सांत्वना देते हुए कहा कि विभाग इस दुःख में उनके साथ है और नियमानुसार मिलने वाली हर सरकारी मदद को जल्द से जल्द दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
इलाज के दौरान अतरौली की शिक्षामित्र सविता देवी ने तोड़ा दम
दूसरी दुखद घटना नीमगांव थाना क्षेत्र के अतरौली गांव से सामने आई है। यहाँ प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत 45 वर्षीय शिक्षामित्र सविता देवी का लखनऊ के अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सविता देवी कथित मानसिक उत्पीड़न और तनाव के कारण काफी समय से परेशान थीं।
इसी तनाव के चलते उन्होंने मंगलवार को पराली के ढेर में आग लगाकर आत्मघाती कदम उठाया था। ग्रामीणों द्वारा बचाए जाने के बाद उन्हें गंभीर हालत में जिला अस्पताल और फिर लखनऊ रेफर किया गया था, जहाँ उन्होंने अंतिम सांस ली। सविता देवी अपने पीछे 5 वर्षीय मासूम पुत्र विराट को छोड़ गई हैं। पुलिस प्रशासन और परिजनों की उपस्थिति में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया है।


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