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अब एक ही छत के नीचे नर्सरी से इंटर तक की शिक्षा, योगी सरकार ने जारी किए ₹100 करोड़

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और एकीकृत बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में अब 'प्री-प्राइमरी से इंटरमीडिएट' तक की पढ़ाई एक ही परिसर में कराने की योजना (कंपोजिट स्कूल मॉडल) को पंख लग गए हैं। शासन ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए मंगलवार को 100 करोड़ रुपये से अधिक के बजट को हरी झंडी दे दी है।

UP Composite School Building Budget approval
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 

प्रमुख जिलों को मिला बड़ा हिस्सा

​इस योजना के पहले चरण में लखनऊ और वाराणसी समेत एक दर्जन जिलों को शामिल किया गया है। बजट का वितरण जिलों की आवश्यकताओं के अनुसार किया गया है:

  • वाराणसी: बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 12.47 करोड़ रुपये आवंटित।
  • लखनऊ व चंदौली: इन जिलों में भी बड़े स्तर पर निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश।
  • अन्य जिले: प्रदेश के करीब 12 अन्य जिलों में इस मॉडल को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर विस्तार दिया जाएगा।

क्या है इस योजना का उद्देश्य?

​सरकार का मुख्य लक्ष्य छात्रों को एक निरंतर शैक्षिक वातावरण (Seamless Educational Environment) प्रदान करना है। इसके कुछ प्रमुख लाभ इस प्रकार होंगे:

  1. संसाधनों का बेहतर उपयोग: एक ही परिसर होने से खेल के मैदान, लाइब्रेरी और प्रयोगशालाओं का साझा उपयोग प्राथमिक और माध्यमिक दोनों स्तर के छात्र कर सकेंगे।
  2. ड्रॉपआउट दर में कमी: अक्सर देखा जाता है कि स्कूल बदलने के चक्कर में छात्र आठवीं या दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं। एक ही परिसर होने से इस समस्या पर लगाम लगेगी।
  3. प्रशासनिक सुगमता: अलग-अलग परिसरों के बजाय एक ही मैनेजमेंट सिस्टम से स्कूल का संचालन आसान होगा।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे परिसर

​स्वीकृत बजट का उपयोग मुख्य रूप से नए क्लासरूम के निर्माण, स्मार्ट क्लास की स्थापना और छात्रों के लिए बेहतर पेयजल एवं शौचालय सुविधाओं के विकास पर किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इन स्कूलों को 'मॉडल स्कूल' के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि निजी स्कूलों के मुकाबले ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के गरीब छात्र भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पा सकें।

विशेष नोट: यह पहल नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के उन प्रावधानों के अनुरूप है, जिसमें शिक्षा के ढांचे को 5+3+3+4 के फॉर्मेट में ढालने और बुनियादी साक्षरता पर जोर देने की बात कही गई है।


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