उत्तर प्रदेश प्रशासन में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। जहाँ एटा में आंगनबाड़ी भर्ती में अवैध वसूली के आरोप में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) को निलंबित कर दिया गया है, वहीं कासगंज में एक पेशकार को रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ा गया है।
1. एटा: आंगनबाड़ी भर्ती में 64 लाख के घोटाले की साजिश नाकाम
एटा जिले के मुख्य विकास अधिकारी (CDO) डॉ. नागेंद्र नारायण मिश्र को शासन द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
- मामला क्या है? सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें CDO डॉ. नागेंद्र, जिला समन्वयक संजीव पचौरी से बातचीत कर रहे थे। वीडियो में CDO प्रत्येक अभ्यर्थी से 10-10 हजार रुपये की मांग करते सुनाई दे रहे हैं।
- कुल लक्ष्य: जिले में आंगनबाड़ी के कुल 642 पदों पर भर्ती होनी थी। यदि यह योजना सफल हो जाती, तो लगभग 64 लाख रुपये की अवैध वसूली का अनुमान था।
- किसने की शिकायत? बताया जा रहा है कि जिला समन्वयक संजीव पचौरी ने रिश्वत के इस लेन-देन में शामिल होने से इनकार कर दिया और वीडियो साक्ष्य के साथ प्रशासन को लिखित शिकायत दी।
- कार्रवाई: प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया (X) के माध्यम से जानकारी दी कि नियमावली के तहत CDO पर विभागीय कार्रवाई शुरू कर उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है।
2. कासगंज: 25 हजार की रिश्वत लेते पेशकार गिरफ्तार
पटियाली (कासगंज) में एंटी करप्शन टीम ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। तहसीलदार के पेशकार बृजेश यादव को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है।
- घटना का विवरण: आरोपी बृजेश यादव एक व्यक्ति से उसके परिजन की मृत्यु के बाद 'फौती' (उत्तराधिकार) दर्ज करने के नाम पर 25 हजार रुपये की मांग कर रहा था।
- ट्रैप ऑपरेशन: पीड़ित की शिकायत पर एंटी करप्शन ब्यूरो ने जाल बिछाया। पीड़ित को केमिकल लगे नोट देकर तहसील भेजा गया। जैसे ही पेशकार ने पैसे लिए, टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया।
- कानूनी कार्रवाई: आरोपी के खिलाफ पटियाली थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। इस घटना के बाद तहसील परिसर में काफी समय तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।


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