‘3.0 फिटमेंट फैक्टर’ से केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा बदलाव संभव
नई दिल्ली: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर चर्चा तेज होती जा रही है। कर्मचारी संगठनों ने सरकार से मांग की है कि नए वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर लागू किया जाए। इसी संबंध में फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गनाइजेशन (FNPO) ने नेशनल काउंसिल JCM को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है, जिसमें वेतन संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है।
फिटमेंट फैक्टर 3.0: सैलरी पर संभावित प्रभाव
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि फिटमेंट फैक्टर को 3.0 से 3.25 के बीच निर्धारित किया जाना चाहिए। यदि सरकार इस मांग को स्वीकार करती है, तो न्यूनतम वेतन में बड़ा इजाफा हो सकता है। वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 है, जो 2.57 फिटमेंट फैक्टर के आधार पर तय की गई थी। यदि 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 3.0 लागू किया जाता है, तो यही न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़कर लगभग ₹54,000 तक पहुंच सकती है।
| विवरण | वर्तमान (7वां वेतन आयोग) | संभावित (8वां वेतन आयोग) |
|---|---|---|
| न्यूनतम बेसिक सैलरी | ₹18,000 | ₹54,000 |
| फिटमेंट फैक्टर | 2.57 | 3.0 |
विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च पदों पर कार्यरत अधिकारियों के वेतन में यह बढ़ोतरी और भी अधिक प्रभावशाली हो सकती है।
परिवार इकाई में बदलाव का प्रस्ताव
FNPO ने वेतन गणना के मौजूदा फार्मूले में भी संशोधन की मांग की है। वर्तमान व्यवस्था में वेतन का आकलन तीन सदस्यों वाले परिवार को आधार मानकर किया जाता है। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि आज के सामाजिक और आर्थिक परिवेश में यह मानक पर्याप्त नहीं है।
इसलिए प्रस्ताव दिया गया है कि परिवार इकाई को तीन से बढ़ाकर पांच सदस्य किया जाए, जिसमें माता-पिता को भी शामिल किया जाए। यदि वेतन निर्धारण इस नए आधार पर किया जाता है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी लगभग ₹76,360 तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
वेतन आयोग वेतन कैसे तय करता है
वेतन आयोग अपनी सिफारिशें 1957 की इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस के मानकों के आधार पर तैयार करता है। इस प्रक्रिया में कर्मचारियों की मूल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक “कंजम्पशन बास्केट” बनाई जाती है। इसमें रोजमर्रा के जरूरी खर्च शामिल किए जाते हैं, जैसे भोजन, ईंधन, बिजली, पानी, कपड़े और बच्चों की शिक्षा।
इस गणना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि कर्मचारियों को ऐसा वेतन मिले जिससे वे अपने परिवार की आवश्यक जरूरतों को संतुलित रूप से पूरा कर सकें।
8वां वेतन आयोग: संभावित समय-सीमा
आमतौर पर किसी भी वेतन आयोग के गठन से लेकर उसकी सिफारिशों के लागू होने तक लगभग 18 से 20 महीने का समय लग जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जनवरी 2025 में 8वें वेतन आयोग के गठन की घोषणा की गई थी। इसके बाद नवंबर 2025 में आधिकारिक समिति का गठन होने की संभावना जताई जा रही है। समिति को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने के लिए लगभग 18 महीनों का समय दिया जा सकता है।
हालांकि अंतिम निर्णय केंद्र सरकार को ही लेना है, लेकिन 3.0 फिटमेंट फैक्टर की मांग ने केंद्रीय कर्मचारियों के बीच उम्मीदें बढ़ा दी हैं। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो बढ़ती महंगाई के दौर में यह वेतन वृद्धि कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।


Social Plugin