लखनऊ: उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ ने प्रदेश के उन जनपदों और ब्लॉकों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है जहाँ कार्यसमितियों का कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद अब तक चुनाव संपन्न नहीं कराए गए हैं। संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा की ओर से जारी आधिकारिक पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, तो संबंधित कार्यसमितियों को भंग कर दिया जाएगा।
निर्वाचन प्रक्रिया और विवाद की जड़
संघ की नियमावली के अनुसार, ब्लॉक और जनपद स्तरीय कार्यसमितियों का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है। प्रदेश नेतृत्व ने यह संज्ञान लिया है कि कई जनपदों में कार्यकाल खत्म होने के बाद भी न तो चुनाव कराए जा रहे हैं और न ही सदस्यों की सूची व सदस्यता शुल्क जमा किया जा रहा है।
नए निर्देशों के मुख्य बिंदु
संघ के प्रदेश कार्यालय द्वारा लिए गए निर्णयानुसार, चुनाव अब प्रादेशिक पर्यवेक्षक की देख-रेख में होंगे। मुख्य दिशा-निर्देश निम्नलिखित हैं:
- सदस्यता का आधार: निर्वाचन हेतु मतदाता संख्या का निर्धारण वर्ष 2025 की सदस्यता के आधार पर किया जाएगा।
- अंतिम समय सीमा: जिन जनपदों में ब्लॉक और जिला दोनों स्तर पर कमेटियां कालातीत (Expired) हो चुकी हैं, उन्हें 20 फरवरी, 2026 तक अंतिम मतदाता सूची प्रदेश कार्यालय को उपलब्ध करानी होगी।
- अनुशासनात्मक कार्रवाई: यदि निर्धारित तिथि तक अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो कालातीत हो चुकी कार्यसमिति को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह स्थानीय इकाई की होगी।
संगठन को मजबूती देने की तैयारी
शिक्षक संघ के इस कदम को संगठन में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बनाए रखने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। पत्र पर प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा, कोषाध्यक्ष शिवशंकर पाण्डेय और महामंत्री संजय सिंह के हस्ताक्षर हैं, जो यह दर्शाता है कि शीर्ष नेतृत्व अब इस मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई के मूड में नहीं है।
इस फैसले के बाद अब प्रदेश के तमाम जनपदों में चुनावी हलचल तेज होने की उम्मीद है, ताकि समय रहते अपनी मान्यता बचाई जा सके।


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