लोकसभा में TET अनिवार्यता सम्बन्धी प्रश्न का उत्तर
भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दिनांक 01.09.2025 के अपने निर्णय द्वारा बताया है कि अधिनियम की धारा 23 के तहत टीईटी निर्धारित न्यूनतम योग्यताओं में से एक है और अधिनियम के तहत आने वाले स्कूलों में शिक्षक के रूप में नियुक्ति के लिए यह अनिवार्य है।
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आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले भर्ती किए गए सेवारत शिक्षकों के संबंध में, माननीय न्यायालय ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए व्यवस्था दी है कि जिन शिक्षकों की सेवा पांच वर्ष से अधिक बची है, वे सेवा में बने रहने के लिए निर्णय की तारीख से दो वर्ष की अवधि के भीतर टीईटी उत्तीर्ण कर सकते हैं। जिन शिक्षकों की सेवा निर्णय की तारीख तक पांच वर्ष से कम बची है, उन्हें टीईटी पास किए बिना सेवानिवृत्ति की आयु तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी गई है; तथापि, ऐसे शिक्षक तब तक पदोन्नति के लिए पात्र नहीं होंगे जब तक वे टीईटी पास नहीं कर लेते।
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माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि आरटीई अधिनियम के तहत सांविधिक ढांचे के अनुसरण में, शिक्षक के तौर पर नियुक्ति पाने की इच्छुक सभी लोगों के लिए, साथ ही पदोन्नति के माध्यम से नियुक्ति की इच्छा रखने वाले सेवारत शिक्षकों के लिए भी योग्यता अनिवार्य है।


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