लखनऊ: उत्तर प्रदेश के प्राथमिक शिक्षकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आ रही है। लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़े 17,140 वेतन विसंगति मामले में अब निर्णायक मोड़ आ गया है। 'शिक्षकों के मसीहा' कहे जाने वाले माननीय देवेंद्र प्रताप सिंह के कड़े प्रयासों और तार्किक पैरवी के बाद, बेसिक शिक्षा मंत्री ने इस विसंगति को दूर करने का ठोस आश्वासन दिया है।
यह प्रकरण उन प्राथमिक शिक्षकों से जुड़ा है जिनकी पदोन्नति 1 दिसंबर 2008 से 21 सितंबर 2015 के मध्य हुई थी। इन शिक्षकों का तर्क है कि उन्हें पुनरीक्षित वेतनमान के तहत उचित लाभ नहीं मिला, जिससे उनके वेतन में भारी अंतर पैदा हो गया। पिछले काफी समय से यह मामला 'मृतप्राय' माना जा रहा था, लेकिन हालिया वार्ता ने इसे फिर से शासन की प्राथमिकता में ला खड़ा किया है।
नेतृत्व की कुशलता और मंत्री का रुख
बैठक के दौरान देवेंद्र प्रताप सिंह ने मजबूती से शिक्षकों का पक्ष रखा। उनके तर्कों से सहमत होते हुए माननीय मंत्री जी ने स्पष्ट किया कि
"यदि वास्तव में वेतन विसंगति विद्यमान है, तो सरकार उसे दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। शिक्षकों का अहित नहीं होने दिया जाएगा।"
शिक्षकों को मिलने वाले संभावित लाभ
यदि इस विसंगति का समाधान होता है, तो हजारों शिक्षकों को निम्नलिखित लाभ मिल सकते हैं:
- 17,140 का मूल वेतन: पदोन्नत शिक्षकों के मूल वेतन में सम्मानजनक वृद्धि।
- बकाया एरियर: 2008 से अब तक के अंतर की धनराशि का भुगतान।
- पेंशन और ग्रेच्युटी में सुधार: वेतन बढ़ने से भविष्य के लाभों में भी आनुपातिक बढ़ोतरी होगी।
देवेंद्र प्रताप सिंह के कुशल नेतृत्व ने यह सिद्ध कर दिया है कि सही पैरवी और अटूट संकल्प से कठिन से कठिन समस्याओं का समाधान संभव है। प्राथमिक शिक्षक जगत में इस खबर के बाद उत्साह का माहौल है और सभी को जल्द ही शासनादेश जारी होने की प्रतीक्षा है।


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