लखनऊ: उत्तर प्रदेश के हजारों शिक्षामित्रों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से अपने घर के नजदीक तैनाती की मांग कर रहे शिक्षामित्रों को जल्द ही उनकी मूल ग्राम पंचायतों में स्थानांतरित किया जाएगा। विधानसभा सत्र के दौरान बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने स्पष्ट किया कि सरकार इस संबंध में पहले ही आदेश जारी कर चुकी है और प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
SIR प्रक्रिया के बाद शुरू होगी रिलीविंग
सपा विधायक ओम प्रकाश द्वारा उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने बताया कि तैनाती के आदेश हो चुके हैं, लेकिन वर्तमान में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया चल रही है।
- शिक्षामित्रों की ड्यूटी इस महत्वपूर्ण कार्य में लगी हुई है।
- जैसे ही SIR की प्रक्रिया पूरी होगी, शिक्षामित्रों को उनके गृह जिलों की ग्राम पंचायतों में तैनाती के लिए कार्यमुक्त (Relieving) कर दिया जाएगा।
मानदेय और सम्मानजनक वेतन पर सदन में चर्चा
सत्र के दौरान शिक्षामित्रों की आर्थिक स्थिति पर भी तीखी बहस हुई। सपा विधायक ओम प्रकाश ने कहा कि:
- एक ही विद्यालय में नियमित शिक्षकों को 80 हजार से 1 लाख रुपये मिल रहे हैं, जबकि शिक्षामित्र मात्र 10,000 रुपये पर काम कर रहे हैं।
- प्रदेश में लगभग 1,37,500 शिक्षामित्र हैं, जिनमें से 37 हजार टीईटी (TET) पास हैं, फिर भी उन्हें भर्तियों में उचित स्थान नहीं मिला।
- अन्य राज्यों की तुलना में यूपी में मानदेय वृद्धि की गति धीमी है।
इसके जवाब में मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि 2017 से पहले मानदेय केवल 3500 रुपये था, जिसे भाजपा सरकार ने बढ़ाकर 10,000 रुपये किया है और भविष्य में भी बेहतरी के लिए कदम उठाए जाएंगे।
कैशलेस इलाज की सुविधा भी लागू
मंत्री ने यह भी याद दिलाया कि सरकार ने शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और शिक्षकों के लिए कैशलेस इलाज का आदेश जारी कर दिया है, जिससे उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ी राहत मिलेगी।
निजीकरण के मुद्दे पर विपक्ष का वॉकआउट
एक ओर जहाँ शिक्षामित्रों के मुद्दे पर चर्चा हुई, वहीं विधान परिषद में निजीकरण और आउटसोर्सिंग को लेकर भारी हंगामा हुआ। सपा सदस्यों ने आरोप लगाया कि:
- सरकार विभागों के खाली पदों को भरने के बजाय आउटसोर्सिंग को बढ़ावा दे रही है।
- आउटसोर्सिंग के कारण बाबा साहब भीमराव अंबेडकर द्वारा दी गई आरक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
- युवाओं को बीमा और पेंशन जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
विपक्ष के इन आरोपों और सरकार के जवाबों के बीच असहमति जताते हुए सपा सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन (वॉकआउट) किया।


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