उत्तर प्रदेश सरकार ने महिलाओं, बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए एनीमिया के खिलाफ जंग छेड़ दी है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के स्कूलों और ग्राम पंचायतों को 'एनीमिया मुक्त' घोषित करना है। इसके लिए शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर कई अन्य विभाग एक साझा मंच पर काम करेंगे।
इस अभियान का केंद्र बिंदु शैक्षणिक संस्थान हैं। स्कूलों में टीमें भेजने के पीछे सरकार के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
- जागरूकता की अलख: टीमें स्कूलों में जाकर छात्रों को एनीमिया के लक्षणों और उससे बचाव के तरीकों के प्रति जागरूक करेंगी।
- शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार: एनीमिया के कारण बच्चों की एकाग्रता और कार्यक्षमता कम हो जाती है। कैंपस में अभियान चलाकर उनके स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है ताकि वे पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
- समयबद्ध जांच और उपचार: स्कूलों में छात्रों की एनीमिया जांच की जाएगी और प्रभावित बच्चों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
डिजिटल ट्रैकिंग और नई दवाएं
सरकार इस बार तकनीक और बेहतर गुणवत्ता वाली दवाओं पर जोर दे रही है:
- डिजिटल रिपोर्टिंग सिस्टम: लाभार्थियों की सटीक ट्रैकिंग के लिए एक समग्र डिजिटल प्रणाली विकसित की जाएगी। इससे जांच से लेकर फॉलो-अप तक का पूरा डेटा पारदर्शी रहेगा।
- बेहतर दवाएं (फेरस एस्कॉरबेट): अब पुरानी 'फैरस सल्फेट' की गोलियों की जगह 'फेरस एस्कॉरबेट' की गोलियों का वितरण किया जाएगा। यूपी मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन को इसकी तत्काल खरीद के निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि यह दवा शरीर में बेहतर अवशोषित होती है।
अभियान के मुख्य स्तंभ
| स्तंभ | विवरण |
|---|---|
| सहभागी विभाग | स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायती राज और जिला प्रशासन। |
| फोकस ग्रुप | गर्भवती महिलाएं, शिशु, बच्चे और किशोरियां। |
| नई पहल | एनीमिया मुक्त क्लास, एनीमिया मुक्त विद्यालय और एनीमिया मुक्त पंचायत। |
| सोशल मीडिया | बड़े पैमाने पर डिजिटल जागरूकता कार्यक्रम का संचालन। |
महत्वपूर्ण नोट: यह अभियान चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा, जिसमें समुदाय की सक्रिय भागीदारी को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया है।


Social Plugin