श्रावस्ती। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर शनिवार को गिलौला स्थित बीआरसी भवन में ब्लॉक कार्यकारिणी की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु वर्ष 2011 (शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने) से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी (TET) की अनिवार्यता थोपा जाना रहा। शिक्षकों ने सरकार के इस निर्णय के प्रति गहरा रोष व्यक्त करते हुए इसे अपनी जीविका पर सीधा हमला करार दिया है।
'अनुभव बनाम परीक्षा' का तर्क
बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाध्यक्ष विनय पांडेय ने कड़े शब्दों में कहा कि सरकार का यह दोहरा चरित्र अब खुलकर सामने आ गया है। उन्होंने तार्किक सवाल उठाते हुए न्यायपालिका और सेना का उदाहरण दिया:
- न्यायपालिका: "क्या 20 साल पहले नियुक्त हुए न्यायाधीश आज 'क्लैट' (CLAT) की परीक्षा पास कर पाएंगे?"
- सेना/पुलिस: "यदि पुराने जवानों से आज 10 किलोमीटर की दौड़ लगाने को कहा जाए, तो विभाग खाली हो जाएगा।"
पांडेय ने आगे कहा कि 50-55 वर्ष की आयु के शिक्षकों से, जिनके पास 20-25 वर्षों का लंबा शैक्षणिक अनुभव है, अब पात्रता परीक्षा की उम्मीद करना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध है।
20 लाख शिक्षकों के भविष्य पर संकट
जिला मंत्री सत्य प्रकाश वर्मा और जिला उपाध्यक्ष हरीश कुमार ने इस स्थिति के लिए सरकार की 'लचर पैरवी' को जिम्मेदार ठहराया। पदाधिकारियों का मानना है कि इस निर्णय से देश भर के 20 लाख शिक्षक और उनके करोड़ों परिजन सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।
"संसद के बाहर शिक्षकों के हित की बात करने वाले नेता, सदन के भीतर उनके हितों के विपरीत राग अलाप रहे हैं।"
प्रदर्शन और उपस्थिति
बैठक के दौरान शिक्षकों ने केंद्रीय मंत्री के बयानों की निंदा की और अपना विरोध दर्ज कराया। इस अवसर पर संगठन ने स्पष्ट किया कि वे अपनी मांगों को लेकर अब 'आर-पार' की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं।
बैठक में मुख्य रूप से उपस्थित रहे:
आनंद त्रिपाठी, सादिक अख्तर, रामकरन चौहान, अनूप गिरी, अशोक कुमार, अरविंद यादव, ज्ञानेंद्र भूषण, राकेश चौधरी, आरती गुप्ता, अनिल शुक्ला, आभा अस्थाना, रीता देवी और ओमप्रकाश तिवारी सहित सैकड़ों शिक्षक एवं पदाधिकारी।


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