टीईटी अनिवार्यता पर देशभर में आक्रोश: 20 लाख शिक्षकों की दिल्ली कूच की चेतावनी
लखनऊ: देश के प्राथमिक शिक्षकों और केंद्र सरकार के बीच 'शिक्षक पात्रता परीक्षा' (TET) की अनिवार्यता को लेकर ठन गई है। अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने इस मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए एक बार फिर देशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।
क्यों भड़का है शिक्षकों का गुस्सा?
हाल ही में लोकसभा में टीईटी की अनिवार्यता को लेकर सरकार द्वारा दिए गए एक जवाब ने आग में घी डालने का काम किया है। संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडे के अनुसार, सरकार के इस रुख से देशभर के लगभग 20 लाख शिक्षक सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं, जिनमें अकेले उत्तर प्रदेश के 2 लाख शिक्षक शामिल हैं।
आंदोलन की रूपरेखा: सड़क से सदन तक घेराव
संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सरकार ने जल्द ही शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए कोई ठोस समाधान नहीं निकाला, तो शिक्षक अब खामोश नहीं बैठेंगे। आंदोलन की रणनीति के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- दिल्ली मार्च: देश भर के लाखों शिक्षक राजधानी दिल्ली कूच करेंगे।
- देशव्यापी विरोध: राज्य स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक क्रमबद्ध तरीके से प्रदर्शन किए जाएंगे।
- सदन का घेराव: शिक्षक अपनी मांगों को लेकर संसद के बाहर भी हुंकार भरेंगे।
"अगर सरकार हमारे भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कोई रास्ता नहीं निकालती, तो अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले लाखों शिक्षक सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।"
— — सुशील कुमार पांडे, राष्ट्रीय अध्यक्षशिक्षकों के इस कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि टीईटी का मुद्दा केवल एक नीतिगत फैसला नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की जीविका से जुड़ा सवाल बन चुका है। अब सबकी निगाहें केंद्र सरकार पर टिकी हैं कि क्या वह बीच का कोई रास्ता निकालती है या फिर देश एक बड़े शिक्षक आंदोलन का गवाह बनेगा।


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