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अंतरजनपदीय तबादले की टीस: 47 हजार शिक्षक बने 'वरिष्ठ' से 'कनिष्ठ', पदोन्नति पर लगा ग्रहण

Sir Ji Ki Pathshala

यूपी बीटीसी शिक्षक संघ ने उठाई आवाज, मौलिक नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता तय करने की मांग

लखनऊ | उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में अंतरजनपदीय स्थानांतरण (Inter-district transfer) का लाभ लेने वाले शिक्षकों के सामने अब अपनी 'वरिष्ठता' (Seniority) बचाने का संकट खड़ा हो गया है। मनचाहे जिले में तैनाती मिलने की खुशी तब फीकी पड़ गई, जब वर्तमान नियमों के तहत हजारों शिक्षक 'सीनियर' होने के बावजूद 'जूनियर' की श्रेणी में आ गए।

Inter-district transfer Seniority matter

​रविवार को राजधानी लखनऊ में आयोजित उप्र बीटीसी शिक्षक संघ की प्रांतीय कोर कमेटी की बैठक में इस मुद्दे पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया।

क्या है पूरा मामला?

​संघ के मुताबिक, वर्तमान व्यवस्था में जब कोई शिक्षक एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरित होता है, तो उसकी वरिष्ठता की गणना 'नए विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने की तिथि' से की जाती है। इसका सीधा अर्थ यह है कि भले ही शिक्षक ने कई वर्षों तक सेवा दी हो, नए जिले में पहुंचते ही उसे सबसे कनिष्ठ (Junior) मान लिया जाता है।

संघ का तर्क: नियुक्ति राज्य स्तर पर, तो वरिष्ठता जिलेवार क्यों?

​बैठक में संघ के पदाधिकारियों ने तर्क दिया कि शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया और स्थानांतरण दोनों ही प्रदेश स्तर पर संचालित होते हैं। ऐसे में वरिष्ठता का निर्धारण भी 'मौलिक नियुक्ति तिथि' (Original Appointment Date) से होना चाहिए, न कि तबादले के बाद नई ज्वाइनिंग की तारीख से।

47 हजार शिक्षकों के भविष्य पर असर

​संघ के प्रांतीय अध्यक्ष अनिल यादव ने आंकड़ों के जरिए स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया:

    • ​बीते वर्ष पहले चरण में लगभग 27,000 शिक्षकों का स्थानांतरण हुआ।
    • ​दूसरे चरण में करीब 20,000 शिक्षकों को तबादला मिला।
    • ​इस प्रकार, कुल 47,000 शिक्षक वर्तमान नियम के चलते वरिष्ठ से कनिष्ठ हो गए हैं।

​अनिल यादव ने कहा, "वरिष्ठता जाने का सीधा असर शिक्षकों की पदोन्नति (Promotion) पर पड़ रहा है। वरिष्ठ शिक्षक प्रमोशन की कतार में सबसे पीछे धकेल दिए गए हैं, जो उनके साथ अन्याय है।"

गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति की गुहार

​वरिष्ठता के मुद्दे के अलावा, बैठक में शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों (Non-teaching duties) में लगाने का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया। संघ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और शिक्षकों को केवल शिक्षण कार्य तक ही सीमित रखने का आदेश दें, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित न हो।


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