प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में सालों से लंबित 72,825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती का मामला अब अपने निर्णायक पड़ाव पर पहुँच गया है। कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करने के बावजूद चयन से वंचित रहे हजारों अभ्यर्थियों की उम्मीदें आज सर्वोच्च न्यायालय पर टिकी हैं। शीर्ष अदालत आज इस मामले में एक बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई करने जा रही है, जो एक दशक से चल रहे कानूनी संघर्ष का अंत कर सकती है।
इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (बेसिक शिक्षा) पार्थसारथी सेनशर्मा को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए बुलाया है। अदालत शासन से रिक्त पदों और योग्य याचिकाकर्ताओं के समायोजन पर स्पष्ट रुख जानना चाहती है।
14,851 अभ्यर्थियों की सूची हुई सार्वजनिक
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की वेबसाइट पर उन 14,851 याचिकाकर्ताओं की आधिकारिक सूची पहले ही अपलोड की जा चुकी है, जिन्होंने 25 जुलाई 2017 से पहले याचिका दायर की थी।
सूची से जुड़ी मुख्य बातें:
- कुल आवेदन: 16,478 अभ्यर्थियों ने 16 दिसंबर 2025 तक अपना विस्तृत प्रोफॉर्मा जमा किया था।
- पात्र याचिकाकर्ता: जांच के बाद 14,851 अभ्यर्थियों का नाम सूची में शामिल किया गया।
- बाहर हुए अभ्यर्थी: लगभग 1,627 अभ्यर्थी आवश्यक साक्ष्य (25 जुलाई 2017 से पहले की याचिका का विवरण) न दे पाने के कारण सूची से बाहर हो गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह कानूनी विवाद सिविल अपील संख्या 4347-4375/2014 और उससे जुड़ी याचिकाओं से संबंधित है।
- 25 जुलाई 2017: सुप्रीम कोर्ट ने इस भर्ती पर अंतिम निर्णय दिया था।
- विवाद का जड़: हजारों ऐसे अभ्यर्थी थे जिनके अंक कट-ऑफ से ज्यादा थे, लेकिन तकनीकी कारणों या सीटों के भरने के दावे के कारण उन्हें नियुक्ति नहीं मिली।
- खाली पद: रिपोर्ट के अनुसार, इस भर्ती प्रक्रिया में अभी भी 6,170 पद खाली बताए जा रहे हैं, जिन पर इन याचिकाकर्ताओं की दावेदारी है।
नोट: आज की सुनवाई मुख्य रूप से उन अवमानना याचिकाओं पर आधारित है, जिनमें अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि योग्य होने के बावजूद कोर्ट के पुराने आदेशों का पालन नहीं किया गया।


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