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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आश्रित कोटे में शिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता साफ

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मृतक आश्रित कोटे में सहायक अध्यापक भर्ती के एकल पीठ के आदेश पर रोक लगाई। जानें शासनादेशों की वैधता और भर्ती पर कोर्ट का फैसला

प्रयागराज। मृतक आश्रित कोटे में सहायक अध्यापकों की नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने अहम अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने एकल पीठ द्वारा दिए गए उस आदेश के प्रभाव और क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है, जिसमें सहानुभूति के आधार पर नियुक्ति देने का निर्देश दिया गया था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति एस.डी. सिंह और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल शामिल थे, ने मेरठ निवासी अनिरुद्ध यादव की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।

Allahabad High Court decision on UP dependent quota teacher recruitment

अपीलार्थी की ओर से अधिवक्ताओं शिवम यादव और हिमांशु बंसल ने दलील दी कि 4 सितंबर 2000 और 15 फरवरी 2013 के शासनादेशों को उनकी विधिक वैधता को प्रत्यक्ष चुनौती दिए बिना असंवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता।

खंडपीठ ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी वैधानिक नियम या शासनादेश को तब तक असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता, जब तक उसकी वैधता को विधिवत चुनौती न दी जाए।

एकल पीठ के आदेश पर रोक

खंडपीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया एकल पीठ द्वारा शासनादेशों को असंवैधानिक मानते हुए दिया गया आदेश विधिक रूप से उचित प्रतीत नहीं होता। इसी आधार पर अदालत ने एकल पीठ के निर्णय के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है।

इस अंतरिम आदेश के बाद मृतक आश्रित कोटे में सहायक अध्यापक भर्ती का मार्ग प्रशस्त हो गया है। अब संबंधित विभाग शासनादेशों के अनुरूप नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकेगा।

हालांकि, अंतिम निर्णय विशेष अपील के निस्तारण के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल, खंडपीठ के इस आदेश को आश्रित अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।