कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश। अक्सर कहा जाता है कि एक सच्चा शिक्षक अपने कार्य को केवल नौकरी नहीं, बल्कि जीवन का मिशन मानता है। उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में तैनात एक सहायक अध्यापक ने इस बात को सच कर दिखाया है। सरकार द्वारा चलाए जा रहे 'निपुण भारत मिशन' से प्रभावित होकर शिक्षक कृष्ण कुमार जायसवाल ने अपने नवजात पुत्र का नाम ही 'निपुण लक्ष्य' रख दिया है।
क्या है पूरा मामला?
जनपद कौशाम्बी के कड़ा ब्लॉक स्थित प्राथमिक विद्यालय पवासा में कार्यरत कृष्ण कुमार जायसवाल को हाल ही में पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। जहाँ लोग अपने बच्चों के लिए आधुनिक या पारंपरिक नाम खोजते हैं, वहीं कृष्ण कुमार ने अपने विभाग के सबसे महत्वपूर्ण अभियान को अपने पारिवारिक जीवन से जोड़ लिया।
नाम रखने के पीछे का उद्देश्य
शिक्षक कृष्ण कुमार के अनुसार, इस अनोखे नामकरण के पीछे एक गहरा उद्देश्य छिपा है:
- निरंतर स्मरण: वे कहते हैं कि जब भी वे अपने बेटे को पुकारेंगे, उन्हें बुनियादी शिक्षा के लक्ष्य को प्राप्त करने की अपनी जिम्मेदारी याद आएगी।
- प्रेरणा का स्रोत: यह नाम उन्हें और उनके आस-पास के लोगों को शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के प्रति सजग रखेगा।
- अभियान का सम्मान: यह महानिदेशक स्कूल शिक्षा के उस 'पावन अभियान' के प्रति एक सम्मान है, जिसका उद्देश्य बच्चों में आधारभूत साक्षरता सुनिश्चित करना है।
"मेरा बेटा जब-जब मेरे सामने होगा, मुझे अपने पेशेवर कर्तव्यों और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का बोध कराता रहेगा।"
— कृष्ण कुमार जायसवाल (शिक्षक)समाज में चर्चा का विषय
यह खबर सोशल मीडिया और शिक्षा जगत में तेजी से वायरल हो रही है। लोग शिक्षक के इस जज्बे की तारीफ कर रहे हैं। यह घटना दर्शाती है कि यदि सरकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर ऐसे समर्पित कर्मचारी मिलें, तो मिशन की सफलता निश्चित है।


