लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधान परिषद में शिक्षा के गिरते स्तर और शिक्षकों की कमी के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्यों ने सरकार पर शिक्षा व्यवस्था की अनदेखी का आरोप लगाते हुए सदन से वॉकआउट किया, जबकि सरकार ने जल्द ही रिक्त पदों को भरने का आश्वासन दिया है।
विपक्ष का आरोप: "7 साल में बंद हुए 36 हजार स्कूल"
सपा एमएलसी किरण पाल कश्यप और आशुतोष सिन्हा ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिए शिक्षा का मुद्दा उठाया। विपक्ष ने निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर सरकार को घेरा:
- स्कूलों की बंदी: विपक्ष का दावा है कि एक तरफ जनसंख्या बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ पिछले 7 वर्षों में 36 हजार प्राथमिक स्कूल बंद कर दिए गए हैं।
- शिक्षकों की कमी: नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने उदाहरण देते हुए कहा कि बलिया के राजकीय इंटर कॉलेज में 4 हजार बच्चों पर मात्र 7 शिक्षक तैनात हैं।
- भर्ती में सुस्ती: आरोप लगाया गया कि शिक्षा सेवा चयन आयोग निष्क्रिय है और पिछले तीन साल से कोई नई भर्ती नहीं हुई है।
- शिक्षामित्रों का मुद्दा: सपा ने मांग की कि वर्षों से पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता खत्म की जाए और शिक्षामित्रों का वेतन दोगुना कर उसे महंगाई से जोड़ा जाए।
सरकार का पलटवार: "एक भी स्कूल बंद नहीं हुआ"
विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह ने सरकार का पक्ष रखा। उनके जवाब के मुख्य अंश इस प्रकार हैं:
- भर्ती का आश्वासन: मंत्री ने कहा कि गणित और विज्ञान के शिक्षकों के साथ-साथ जूनियर एडेड स्कूलों के रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाएगा।
- दावों का खंडन: उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में एक भी विद्यालय बंद नहीं हुआ है। उनके इस बयान पर सपा सदस्यों ने 'असंतोष' जताते हुए सदन से बहिर्गमन (वॉकआउट) कर दिया।
- कानूनी बाध्यता: TET की अनिवार्यता पर उन्होंने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट का फैसला है, हालांकि इस मामले में कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल की गई है।
- बुनियादी सुविधाएं: सरकार ने संकल्प दोहराया कि इसी कार्यकाल में हर विद्यालय को आधुनिक फर्नीचर की सुविधा मुहैया करा दी जाएगी।
शिक्षा के मुद्दे पर सदन में मचे इस घमासान से साफ है कि आने वाले दिनों में शिक्षक भर्ती और शिक्षामित्रों का समायोजन उत्तर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में रहने वाला है।


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