देवरिया/गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ एक सहायक शिक्षक ने बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और उनके कार्यालय के एक बाबू पर गंभीर आरोप लगाते हुए आत्महत्या कर ली। शिक्षक का शव उनके आवास पर फंदे से लटका मिला। इस घटना के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और शासन ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
मृतक शिक्षक श्री कृष्ण मोहन सिंह, देवरिया के गौरीबाजार स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन में कार्यरत थे। मृतक की पत्नी, गुड़िया सिंह द्वारा दर्ज कराई गई FIR के अनुसार, साल 2023 में उनके पति की नियुक्ति को गलत तरीके से निरस्त कर दिया गया था। इसके खिलाफ शिक्षक ने माननीय उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जहाँ से उनके पक्ष में आदेश पारित हुआ।
आरोप है कि उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद, नियुक्ति बहाल करने के नाम पर देवरिया बीएसए कार्यालय में तैनात बाबू संजीव सिंह ने 16 लाख रुपये की मांग की। पीड़ित पक्ष का दावा है कि उन्होंने 7.16 लाख रुपये का भुगतान भी किया, लेकिन इसके बावजूद बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और बाबू संजीव सिंह द्वारा और पैसों की डिमांड की जा रही थी।
प्रताड़ना और धमकी का आरोप
शिकायत के मुताबिक, 20 फरवरी 2026 को शिक्षक को बीएसए कार्यालय बुलाकर काफी प्रताड़ित किया गया और उन्हें फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। इसी मानसिक तनाव और आर्थिक शोषण से तंग आकर कृष्ण मोहन सिंह ने 20-21 फरवरी की रात पंखे से लटककर अपनी जान दे दी।
शासन की सख्त कार्रवाई और FIR
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने गोरखपुर के गुलरिहा थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 351(3) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। नामजद आरोपियों में शामिल हैं:
- शालिनी श्रीवास्तव (तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी, देवरिया)
- संजीव सिंह (बाबू, बीएसए कार्यालय, देवरिया)
उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन
महानिदेशक, स्कूल शिक्षा (उत्तर प्रदेश) ने इस प्रकरण की जांच के लिए 04 सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया है। इस समिति में निम्नलिखित अधिकारी शामिल हैं:
- श्री संजय कुमार उपाध्याय (उप शिक्षा निदेशक, लखनऊ)
- डॉ. पवन सचान (संयुक्त शिक्षा निदेशक, लखनऊ)
- संबंधित तहसील के उप जिलाधिकारी (देवरिया)
- मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक), गोरखपुर
समिति को तत्काल घटनास्थल का भ्रमण कर विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं ताकि दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जा सके।





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