मेरठ/मुजफ्फरनगर: मुजफ्फरनगर के एक सहायक अध्यापक वैभव सिंघल, जो मेरठ में केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) देने गए थे, परीक्षा हॉल में ही ब्रेन हेमरेज का शिकार हो गए। पांच दिनों तक आईसीयू में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष करने के बाद शुक्रवार को उनका निधन हो गया। इस घटना ने शिक्षकों के बीच व्याप्त मानसिक तनाव और विभागीय दबाव को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
परीक्षा कक्ष में बिगड़ी थी तबीयत
जानकारी के अनुसार, मुजफ्फरनगर के शांतिनगर निवासी वैभव सिंघल (48 वर्ष) पुरकाजी क्षेत्र के बढ़ीवाला स्थित कंपोजिट विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत थे। बीती 8 फरवरी को वह मेरठ के डीपीएस स्कूल में आयोजित CTET परीक्षा देने पहुंचे थे। परीक्षा शुरू होने के कुछ ही देर बाद वह अचानक अचेत होकर गिर पड़े। उन्हें तुरंत मेरठ के सुभारती मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन हेमरेज होने की पुष्टि की।
'टीईटी' की अनिवार्यता का दबाव बना काल
शिक्षक संघों और परिजनों का आरोप है कि वैभव पिछले काफी समय से शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर अत्यधिक मानसिक तनाव में थे। उत्तर प्रदेश में कार्यरत कई पुराने शिक्षकों के लिए इस पात्रता को सिद्ध करने का दबाव उनके स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहा है।
"वैभव काफी समय से परीक्षा को लेकर चिंतित थे। कार्यरत शिक्षकों पर इस तरह का दबाव बनाना अनुचित है। सरकार को इस पर कोई व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए।"— रामरतन वर्मा, जिलाध्यक्ष, भाकियू शिक्षक प्रकोष्ठ
परिवार और विभाग में शोक की लहर
वैभव का पूरा परिवार शिक्षा विभाग से जुड़ा है। उनकी पत्नी दीपा और उनकी बहन भी सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत हैं। वैभव के निधन की खबर मिलते ही मुजफ्फरनगर के शिक्षक समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम संस्कार में एडीएम (वित्त एवं राजस्व) गजेंद्र कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षकों ने भाग लिया और उन्हें नम आंखों से विदाई दी।
शिक्षक संघों की मांग: नीतियों पर हो पुनर्विचार
इस दुखद घटना के बाद जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ और अन्य शिक्षक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि:
- टीईटी से छूट: सेवा में पहले से कार्यरत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से राहत दी जाए।
- मानसिक स्वास्थ्य: शिक्षकों के कार्यभार और परीक्षा संबंधी दबाव को कम करने के लिए व्यावहारिक नीतियां बनाई जाएं।
- आर्थिक सहायता: मृतक शिक्षक के परिवार को उचित मुआवजा और सहायता प्रदान की जाए।
शिक्षक समाज की यह मांग अब और तेज हो गई है कि आखिर पात्रता साबित करने की इस दौड़ में और कितनी जानों की आहुति दी जाएगी?


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