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शिक्षकों के अस्तित्व की लड़ाई: 'अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ' का गठन, आरटीई के खिलाफ फूंकेंगे बिगुल

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ। टीईटी (TET) अनिवार्यता और योग्यता के नाम पर शिक्षकों के सामने खड़े संकट को देखते हुए देश के विभिन्न शिक्षक संगठनों ने एकजुटता का परिचय दिया है। राजधानी में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान 'अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ' के गठन की घोषणा की गई। इस महासंघ का मुख्य उद्देश्य वर्षों से कार्यरत शिक्षकों के हितों की रक्षा करना और सरकार की नीतियों के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन को गति देना है।

शिक्षकों का बड़ा ऐलान: 'अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ' का गठन, जानें आंदोलन की पूरी रणनीति

सड़क से सदन तक संघर्ष का संकल्प

​बैठक में अपनी बात रखते हुए अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील पांडेय ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के हक के लिए संगठन सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगा।

​वहीं, अटेवा (ATEWA) के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने इसे अस्तित्व की लड़ाई करार दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षक किसी भी मोर्चे पर पीछे नहीं हटेंगे। विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी और महामंत्री दिलीप चौहान ने सवाल उठाया कि नियुक्ति के समय सभी मानक पूरे करने वाले शिक्षकों को दशकों बाद अयोग्य कहना पूरी तरह से अतार्किक और अन्यायपूर्ण है।

आंदोलन की रूपरेखा: ईमेल से लेकर संसद घेराव तक

​महासंघ ने सरकार को जगाने के लिए एक विस्तृत आंदोलनकारी रणनीति तैयार की है:

    • प्रथम चरण (9 से 15 मार्च): 'शिक्षकों की पाती' अभियान के तहत राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष को लाखों की संख्या में ईमेल और पोस्टकार्ड भेजे जाएंगे।
    • द्वितीय चरण (मशाल जुलूस): सरकार के उदासीन रवैये के विरोध में मशाल जुलूस निकालकर जनमत तैयार किया जाएगा।
    • अंतिम चरण (3 मई): यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 3 मई को लखनऊ में एक विशाल धरना आयोजित होगा, जिसके बाद दिल्ली में संसद भवन के घेराव की योजना है।

मुख्य मांग: संसद से पारित हो सुरक्षा कानून

​शिक्षकों का तर्क है कि वे पिछले 25-30 वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को संभाल रहे हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) लागू होने के बाद, नई अर्हताओं को पुराने शिक्षकों पर थोपना उनके और उनके परिवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। महासंघ ने केंद्र सरकार से मांग की है कि ​"संसद द्वारा विशेष कानून पारित कर पुराने शिक्षकों की सेवाओं को सुरक्षित किया जाए और आरटीई की जटिलताओं से उन्हें मुक्ति दी जाए।"

अटेवा, ATEWA, विशिष्ट बीटीसी



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