नई दिल्ली। टेट (शिक्षक पात्रता परीक्षा) अनिवार्यता प्रकरण से जुड़ा मामला एक बार फिर टल गया है। त्रिपुरा सरकार बनाम सजल देब एवं अन्य की ओर से माननीय सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका की सुनवाई तिथि तीसरी बार बढ़ा दी गई है। पहले यह सुनवाई 30 जनवरी को निर्धारित थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 13 फरवरी कर दिया गया है।
गौरतलब है कि इस प्रकरण में सुनवाई की तारीखें लगातार आगे बढ़ती रही हैं। प्रारंभ में मामले की सुनवाई 16 जनवरी को होनी थी, जिसे पहले 23 जनवरी, फिर 30 जनवरी और अब एक बार फिर बढ़ाकर 13 फरवरी तय किया गया है। इस तरह लगातार तीसरी बार सुनवाई टलने से नॉन-टेट शिक्षकों में असमंजस और प्रतीक्षा की स्थिति बनी हुई है।
शिक्षक संगठनों का मानना है कि इस मामले से हजारों नॉन-टेट शिक्षकों का भविष्य जुड़ा हुआ है। वे लंबे समय से इस प्रकरण में स्पष्ट और अंतिम निर्णय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। बार-बार तारीख बढ़ने से शिक्षकों के बीच निराशा जरूर है, लेकिन साथ ही उन्हें यह भी उम्मीद है कि सर्वोच्च न्यायालय इस संवेदनशील मुद्दे पर सभी पक्षों को सुनकर न्यायसंगत फैसला देगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, बार-बार सुनवाई टलने से यह संकेत भी मिलता है कि अदालत इस प्रकरण की गंभीरता को समझते हुए सभी कानूनी पहलुओं पर गहराई से विचार करना चाहती है। अब सभी की निगाहें 13 फरवरी पर टिकी हैं, जब इस बहुप्रतीक्षित मामले में अगली सुनवाई होने की संभावना है।
नई दिल्ली। टेट (शिक्षक पात्रता परीक्षा) अनिवार्यता प्रकरण से जुड़ा मामला एक बार फिर टल गया है। त्रिपुरा सरकार बनाम सजल देब एवं अन्य की ओर से माननीय सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका की सुनवाई तिथि तीसरी बार बढ़ा दी गई है। पहले यह सुनवाई 30 जनवरी को निर्धारित थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 13 फरवरी कर दिया गया है।
गौरतलब है कि इस प्रकरण में सुनवाई की तारीखें लगातार आगे बढ़ती रही हैं। प्रारंभ में मामले की सुनवाई 16 जनवरी को होनी थी, जिसे पहले 23 जनवरी, फिर 30 जनवरी और अब एक बार फिर बढ़ाकर 13 फरवरी तय किया गया है। इस तरह लगातार तीसरी बार सुनवाई टलने से नॉन-टेट शिक्षकों में असमंजस और प्रतीक्षा की स्थिति बनी हुई है।
शिक्षक संगठनों का मानना है कि इस मामले से हजारों नॉन-टेट शिक्षकों का भविष्य जुड़ा हुआ है। वे लंबे समय से इस प्रकरण में स्पष्ट और अंतिम निर्णय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। बार-बार तारीख बढ़ने से शिक्षकों के बीच निराशा जरूर है, लेकिन साथ ही उन्हें यह भी उम्मीद है कि सर्वोच्च न्यायालय इस संवेदनशील मुद्दे पर सभी पक्षों को सुनकर न्यायसंगत फैसला देगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, बार-बार सुनवाई टलने से यह संकेत भी मिलता है कि अदालत इस प्रकरण की गंभीरता को समझते हुए सभी कानूनी पहलुओं पर गहराई से विचार करना चाहती है। अब सभी की निगाहें 13 फरवरी पर टिकी हैं, जब इस बहुप्रतीक्षित मामले में अगली सुनवाई होने की संभावना है।


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