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बीएड डिग्रीधारी परिषदीय शिक्षकों का बढ़ा संकट: टीईटी अनिवार्यता, सीटीईटी फॉर्म और पात्रता नियमों के बीच फंसे लाखों शिक्षक

Sir Ji Ki Pathshala

बीएड डिग्रीधारी परिषदीय शिक्षकों का बढ़ा संकट: टीईटी अनिवार्यता, सीटीईटी फॉर्म और पात्रता नियमों के बीच फंसे लाखों शिक्षक

लखनऊ में परिषदीय विद्यालयों के बीएड डिग्रीधारी शिक्षकों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा टीईटी को अनिवार्य किए जाने के बाद प्रदेश में ऐसे सभी शिक्षकों को दो वर्ष के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। लेकिन समस्या यह है कि पिछले दो वर्षों से यूपी टीईटी आयोजित ही नहीं की गई, जबकि नियमों के अनुसार इसे वर्ष में दो बार होना चाहिए।


TET MATTER

टीईटी अनिवार्य, पर परीक्षा ही नहीं — शिक्षक सबसे बड़ी उलझन में

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, जिन शिक्षकों के पास टीईटी नहीं है, उन्हें अपनी नौकरी बचाने और भविष्य के प्रमोशन के लिए दो साल के भीतर यह परीक्षा पास करना जरूरी है।
लेकिन प्रदेश सरकार ने 2022 और 2023—दोनों ही वर्षों में टीईटी आयोजित नहीं की।

इसके चलते:

  • करीब 1.75 लाख बीएड डिग्रीधारी शिक्षक, जो पहले से प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत हैं,
  • टीईटी अनिवार्यता के दायरे में आने के बावजूद
  • आवेदन तक नहीं कर पा रहे हैं।

सीटीईटी फॉर्म में बीएड शिक्षकों के लिए विकल्प गायब

केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) के आवेदन खुले हैं और 18 दिसंबर अंतिम तिथि है।
लेकिन प्राइमरी स्तर (कक्षा 1–5) के फॉर्म में बीएड पास शिक्षकों के लिए आवेदन का विकल्प मौजूद ही नहीं है

ऐसा इसलिए क्योंकि एनसीटीई (NCTE) के मानकों के अनुसार प्राथमिक शिक्षक के लिए मान्य शैक्षणिक योग्यता केवल डीएलएड (बीटीसी) है, जबकि बीएड की पात्रता केवल जूनियर (कक्षा 6–8) स्तर के लिए वैध मानी जाती है।

इस वजह से पहले से प्राथमिक विद्यालयों में बीएड के आधार पर कार्यरत शिक्षक अब आवेदन भी नहीं कर पा रहे हैं—जिससे उनका करियर अधर में लटक गया है।


संघ ने उठाई आवाज – ‘जब सुप्रीम कोर्ट ने टीईटी अनिवार्य किया, तो आवेदन का विकल्प भी मिलना चाहिए’

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष निर्भय सिंह के अनुसार:

  • टीईटी अनिवार्य है, तो सरकार को बीएड शिक्षकों को आवेदन का अवसर देना चाहिए।
  • दो साल से यूपी टीईटी न होने से शिक्षकों पर नौकरी का संकट गहरा रहा है।
  • प्राइमरी से जूनियर पदोन्नति के लिए भी टीईटी जरूरी है—लेकिन परीक्षा ही नहीं हो रही।

ब्रिज कोर्स न करने वाले बीएड शिक्षक भी मुश्किल में

बीएड शिक्षकों को प्राथमिक स्तर की पात्रता के लिए 6 माह का ब्रिज कोर्स (विशिष्ट बीटीसी) करना होता है।
प्रदेश में बहुत से शिक्षक अभी तक यह कोर्स नहीं कर पाए हैं, और अब वे टीईटी भी नहीं दे पा रहे।
इस दोहरी मार ने हजारों शिक्षकों का भविष्य अनिश्चित कर दिया है।


 न परीक्षा, न स्पष्ट नीति—बीएड शिक्षकों पर भविष्य का खतरा मंडराता हुआ

यूपी में टीईटी परीक्षा न होने, सीटीईटी में आवेदन का विकल्प न मिलने और पात्रता नियमों के टकराव ने लाखों बीएड शिक्षकों का भविष्य संकट में डाल दिया है।
जबकि सुप्रीम कोर्ट की शर्त साफ है—टीईटी पास करना अनिवार्य है।

सरकार से शिक्षक संगठनों की मुख्य मांगें हैं:

  • यूपी टीईटी तुरंत आयोजित की जाए और वर्ष में दो बार नियमित हो,
  • प्राथमिक में कार्यरत बीएड शिक्षकों को अस्थायी रूप से आवेदन का विकल्प दिया जाए,
  • ब्रिज कोर्स को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश और नई तिथि जारी की जाए।

यह मुद्दा अब शिक्षकों के करियर ही नहीं, बल्कि पूरे परिषदीय शिक्षा तंत्र के भविष्य से जुड़ा हुआ है।


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