लखनऊ बेंच का आदेश, अगली सुनवाई 9 जनवरी 2026 को
लखनऊ। बीएड डिग्रीधारक प्राथमिक शिक्षकों को ब्रिज कोर्स के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि याची शिक्षकों को अंतरिम रूप से और सशर्त ब्रिज कोर्स के लिए आवेदन करने की अनुमति दी जाए।
यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने पंकज शर्मा एवं 24 अन्य शिक्षकों द्वारा दाखिल याचिका पर पारित किया।
शासनादेश और आदेश को दी गई चुनौती
मामला राज्य सरकार द्वारा 6 अक्टूबर 2025 को जारी शासनादेश और 13 दिसंबर 2025 को पारित आदेश से जुड़ा है। इन आदेशों में बीएड डिग्रीधारक सहायक अध्यापकों को छह माह के ब्रिज कोर्स में नामांकन करने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही यह भी कहा गया था कि यदि शिक्षक प्रशिक्षण के लिए आवेदन नहीं करते हैं, तो उनकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं।
13 दिसंबर के आदेश के जरिए ब्रिज कोर्स के लिए रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 25 दिसंबर 2025 तय की गई थी।
पहले से कोर्स पूरा करने का दिया गया तर्क
याचियों की ओर से कोर्ट को बताया गया कि कई शिक्षक पहले ही राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) से छह माह का ब्रिज कोर्स पूरा कर चुके हैं, जिसे वैध योग्यता के रूप में मान्यता दी जा चुकी है। ऐसे में दोबारा उसी तरह का प्रशिक्षण कराना अनुचित और अन्यायपूर्ण है।
कोर्ट का अंतरिम आदेश
सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक याची शिक्षकों को अस्थायी रूप से ब्रिज कोर्स के लिए आवेदन करने की अनुमति दी जाए। हालांकि यह अनुमति सशर्त होगी और अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।
अगली सुनवाई 9 जनवरी को
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 9 जनवरी 2026 तय की है। तब तक शिक्षकों को अंतरिम राहत मिलेगी और उनकी सेवाओं पर कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं की जाएगी।

