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“जनजातीय गौरव पखवाड़ा” (1 नवम्बर से 15 नवम्बर 2025 तक) मनाने हेतु सुझावात्मक दिवसवार गतिविधियां देखें

Sir Ji Ki Pathshala
भारत की विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि का एक महत्वपूर्ण अंग हैं — हमारे जनजातीय समाज। इन समुदायों ने सदियों से प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की मिसाल कायम की है। इसी गौरवशाली परंपरा को सम्मान देने के उद्देश्य से भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार 15 नवम्बर 2025 को पूरे देश में ‘जनजातीय गौरव दिवस’ बड़े उत्साह और गर्व के साथ मनाया जाएगा।

भगवान बिरसा मुंडा — संघर्ष और स्वाभिमान के प्रतीक

इस वर्ष का जनजातीय गौरव दिवस विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती का पावन अवसर है।

भगवान बिरसा मुंडा ने 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उलगुलान (महान जनआंदोलन) का नेतृत्व किया और जनजातीय समाज को स्वाभिमान, अधिकार और स्वतंत्रता के लिए एकजुट किया। उनका जीवन आज भी यह संदेश देता है कि संघर्ष केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि स्वाभिमान और अस्तित्व की रक्षा का प्रतीक है।


जनजातीय गौरव पखवाड़ा


धरती आबा की जयंती को भव्य रूप से मनाने हेतु इस वर्ष 1 नवम्बर से 15 नवम्बर 2025 तक पूरे देश में “जनजातीय गौरव पखवाड़ा” आयोजित किया जा रहा है। इसको दृष्टिगत रखते हुए विद्यालयों में निम्नलिखित गतिविधियों का आयोजन किए जाने का निर्देश प्राप्त हुआ है।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में जनजातीय संस्कृति के प्रति जागरूकता, सम्मान और समझ विकसित करना है। यह बिरसा मुंडा और अन्य जनजातीय समुदायों की विरासत और योगदान पर केंद्रित है।

सुझावात्मक दिवसवार गतिविधियां 


Divs 1 : 01 नवम्बर 2025 (शनिवार) 

(उद्घाटन दिवस) जनजातीय गौरव पखवाड़ा का शुभारंभ

• विद्यालय की प्रातः सभा में जनजातीय गौरव पखवाड़ा के शुभारंभ की घोषणा की जाएगी।

• जनजातीय संस्कृति और इतिहास पर आधारित डॉक्यूमेंट्री या प्रस्तुति दिखाई जाएगी, जिसमें विभिन्न जनजातीय परंपराएँ, जीवनशैली और भारतीय समाज में उनके योगदान पर प्रकाश डाला जाएगा।


दिवस 2 : 03 नवम्बर 2025 (सोमवार)

जनजातीय भित्ति चित्र परियोजना (Tribal Wall Art Project)

• विद्यार्थी विद्यालय की दीवारों या निर्धारित स्थानों पर जनजातीय कला (जैसे ‘वारली’, ‘गोंड’ आदि) बना सकते हैं।

• शिक्षक इन कलाओं पर मार्गदर्शन देकर जनजातीय कलात्मक धरोहर के प्रति जागरूकता बढ़ा सकते हैं।


दिवस 3 : 04 नवम्बर 2025 (मंगलवार)

प्रतियोगिताएँ – नृत्य, नाटक, कहानी, मॉडल निर्माण आदि

• विद्यार्थियों के बीच प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाएँ जिनमें जनजातीय संगीत, नृत्य, कहानी-वाचन, नाटक और मॉडल निर्माण शामिल हों।


दिवस 4 : 6 नवम्बर 2025 (गुरुवार)

जनजातीय योगदान पर सेमिनार

• स्थानीय इतिहासकारों या जनजातीय समुदाय के नेताओं को आमंत्रित कर विद्यार्थियों से जनजातीय संस्कृति, इतिहास और योगदान पर चर्चा।

• प्रश्नोत्तर सत्र या क्विज़ आयोजित कर विद्यार्थियों में जिज्ञासा और समझ बढ़ाई जा सकती है।


दिवस 5 : 7 नवम्बर 2025 (शुक्रवार)

कक्षा में चर्चा और निबंध लेखन

• शिक्षक विद्यार्थियों के साथ स्थानीय जनजातीय समुदाय की संस्कृति, भोजन, परंपरा, मूल्यों और विविधता पर चर्चा करेंगे।

• विद्यार्थियों को निबंध लेखन हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा।


दिवस 6 : 10 नवम्बर 2025 (सोमवार)

नाटक/नुक्कड़ नाटक

• किसी प्रसिद्ध जनजातीय व्यक्तित्व के जीवन पर आधारित नाटक या नुक्कड़ नाटक आयोजित किया जाएगा।


दिवस 7 : 11 नवम्बर 2025 (मंगलवार)

जनजातीय संग्रहालय का भ्रमण (जहाँ संभव हो)

• विद्यार्थियों को स्थानीय जनजातीय संग्रहालय ले जाकर जनजातीय इतिहास, वस्तुओं और संस्कृति से परिचित कराना।

• यदि भौतिक भ्रमण संभव न हो तो वर्चुअल भ्रमण कराया जा सकता है।


दिवस 8 : 12 नवम्बर 2025 (बुधवार)

जनजातीय नृत्य और गीतों का सांस्कृतिक कार्यक्रम

• विद्यार्थी जनजातीय नृत्य और गीत प्रस्तुत करें।

• समुदाय के सदस्यों को आमंत्रित कर विद्यार्थियों को पारंपरिक प्रस्तुतियों का अभ्यास कराया जा सकता है।


दिवस 9 : 13 नवम्बर 2025 (गुरुवार)

सामुदायिक भोज (Community Bhoj)

• सामुदायिक भोज का आयोजन करें, जिसमें कम से कम एक जनजातीय व्यंजन शामिल हो।


दिवस 10 : 14 नवम्बर 2025 (शुक्रवार)

आउटरीच कार्यक्रम – जनजातीय घरों का दौरा

• विद्यार्थियों के छोटे समूह बनाकर उन्हें जनजातीय समुदाय के घरों में भेजा जाए ताकि वे सीधे जनजातीय जीवन और परंपराओं का अनुभव कर सकें।

• जनजातीय मेज़बानों से सम्मानपूर्वक सीखने पर बल दिया जाए।


दिवस 11 : 15 नवम्बर 2025 (शनिवार) 

समापन दिवस चिंतन और प्रस्तुति दिवस (Reflection and Presentation Day)

• बिरसा मुंडा को पुष्पांजलि अर्पित करने हेतु विशेष सभा का आयोजन और NCERT द्वारा तैयार की गई डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित की जाए।

• बिरसा मुंडा के जीवन, स्वतंत्रता संग्राम में योगदान, और जनजातीय अधिकारों में उनकी भूमिका साझा की जाए।

• विद्यार्थी सप्ताहभर की गतिविधियों पर अपने अनुभव, प्रोजेक्ट, कला कार्य और प्रस्तुति साझा करें।

• उत्कृष्ट प्रस्तुति देने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जा सकता है।