लखनऊ। फर्नीचर टेंडर में रिश्वतखोरी के गंभीर आरोपों में फंसे गोण्डा के बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) अतुल कुमार तिवारी को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ से राहत नहीं मिल सकी है। न्यायालय ने उनकी याचिका पर सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ता द्वारा याचिका को वापस लेने की अनुमति मांगे जाने पर उसे स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही कोर्ट ने यह याचिका वापस लेने की अनुमति प्रदान कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने पारित किया।
मामला गोण्डा जिले के कोतवाली नगर थाने में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है। इस एफआईआर में बीएसए अतुल कुमार तिवारी सहित डीसी जेम प्रेम शंकर मिश्रा और डीसी सिविल विद्या भूषण मिश्रा पर रिश्वत मांगने और लेने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
एफआईआर के मुताबिक, वादी की कंपनी को जेम पोर्टल के माध्यम से फर्नीचर सप्लाई का ठेका प्राप्त हुआ था। आरोप है कि बीएसए व अन्य अधिकारियों ने वादी से कहा कि यह काम करीब 15 करोड़ रुपये का है, जिसके 15 प्रतिशत यानी लगभग 2 करोड़ 25 लाख रुपये “कमीशन” के रूप में देने होंगे। इसमें से 50 लाख रुपये “उच्च अधिकारियों” को देने की बात कही गई, ताकि आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए जा सकें।
वादी का आरोप है कि दबाव में आकर उसने बीएसए अतुल कुमार तिवारी को 22 लाख रुपये और डीसी जेम प्रेम शंकर मिश्रा व डीसी सिविल विद्या भूषण मिश्रा को चार-चार लाख रुपये दिए। इसके बाद शेष रकम को लेकर अधिकारियों और वादी के बीच विवाद हो गया, जिसके चलते अंततः 4 नवंबर को यह एफआईआर दर्ज कराई गई।
फिलहाल, हाईकोर्ट से राहत न मिलने के बाद बीएसए अतुल कुमार तिवारी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। मामले की जांच जारी है।

