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टीईटी अनिवार्यता समाप्त करने और पुरानी पेंशन बहाली की मांग तेज, दिल्ली में यूपी के हजारों शिक्षक गरजे

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ/नई दिल्ली। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के विरोध और पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) की बहाली की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश के शिक्षकों ने मंगलवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदेशभर के विभिन्न शिक्षक संगठनों के बैनर तले हजारों शिक्षक एकजुट हुए और सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। प्रदर्शन में देशभर के शिक्षकों ने भी समर्थन जताते हुए एकजुटता दिखाई।

TET अनिवार्यता मामला

“सरकार की तानाशाही नहीं चलेगी”—एनएमओपीएस

नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (NMOPS) और सहयोगी संगठनों के नेतृत्व में आयोजित धरने में राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने कहा—

“सरकार को हर हाल में पुरानी पेंशन बहाल करनी होगी। यह लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है।”

उन्होंने टीईटी अनिवार्यता पर केंद्र सरकार को चुनौती देते हुए कहा—

“अगर सरकार 20 साल पहले नियुक्त शिक्षकों को बाहर कर सकती है, तो क्या वह यूपीएससी से चयनित अधिकारियों को भी हटाने की हिम्मत रखती है?”

उनका कहना था कि शिक्षकों को बिना किसी पूर्व शर्त के नियमित सेवा में लिया गया था, इसलिए बाद में परीक्षा थोपना संवैधानिक और मानवीय दोनों दृष्टि से गलत है।


शिक्षक संगठनों की चेतावनी: मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी

यूपी के शिक्षक संगठनों ने साफ चेतावनी दी है कि—

  • पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल किए बिना,
  • और टीईटी की अनिवार्यता स्थायी रूप से समाप्त किए बिना

आंदोलन किसी भी स्थिति में समाप्त नहीं होगा।
शिक्षक नेताओं ने कहा कि पेंशन उनका अधिकार है, उपकार नहीं।


टीईटी के खिलाफ सोमवार को भी शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन

इससे पहले सोमवार को अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर प्रदेश के हज़ारों शिक्षक टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में जुटे थे।

राष्ट्रीय सह-संयोजक अनिल यादव ने कहा—

“शिक्षकों ने अपनी बात मजबूती से संसद और सरकार तक पहुंचा दी है। अब बारी सरकार की है कि वह अध्यादेश लाए और टीईटी अनिवार्यता को स्थायी रूप से खत्म करे।”

उनका दावा है कि टीईटी अनिवार्यता से देशभर में लगभग 10 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं, जिनमें यूपी की संख्या सर्वाधिक है।


केंद्र सरकार पर बढ़ा दबाव

लगातार दो दिनों के बड़े प्रदर्शनों ने टीईटी अनिवार्यता और पुरानी पेंशन बहाली दोनों मुद्दों को फिर से राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है।
शिक्षकों की मांग है कि—

  • संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार कानून लाकर टीईटी अनिवार्यता स्थायी रूप से समाप्त करे,
  • और OPS को पुनः लागू किया जाए।

इन प्रदर्शनों ने स्पष्ट कर दिया है कि संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुका है।

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