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भारत के सरकारी स्कूल का कमाल: उप प्राचार्य गजेंद्र सिंह राठौर का ‘साइकिल ऑफ ग्रोथ’ मॉडल वर्ल्ड एजुकेशन समिट में छाया

Sir Ji Ki Pathshala

मध्यप्रदेश के रतलाम जिले से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है। सांदीपनी स्कूल के उप प्राचार्य गजेंद्र सिंह राठौर द्वारा विकसित ‘साइकिल ऑफ ग्रोथ’ और ‘ब्रूडिंग इफेक्ट’ मॉडल को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। अबू धाबी में आयोजित वर्ल्ड एजुकेशन समिट में इस नवाचार को व्यापक सराहना मिली है।


साइकिल ऑफ ग्रोथ


यह मॉडल बच्चों की सीखने की क्षमता और शिक्षकों की कार्यकुशलता में बड़े पैमाने पर सुधार लाने के लिए विकसित किया गया है। खास बात यह है कि यह प्रयास पूरी तरह से एक सरकारी स्कूल से शुरू हुआ और आज दुनिया के शीर्ष इनोवेटिव स्कूल मॉडलों की सूची में शामिल हो गया है।


⭐ क्या है ‘साइकिल ऑफ ग्रोथ’ मॉडल?

उप प्राचार्य गजेंद्र सिंह राठौर ने सबसे पहले इस मॉडल को रतलाम के विनोबा विद्यालय में लागू किया। इसका मुख्य उद्देश्य था—
● स्कूल की दैनिक गतिविधियों को शिक्षा के अनुरूप ढालना
शिक्षकों की ट्रेनिंग और ब्रेन हमरिंग सेशन्स के माध्यम से पढ़ाने के नए तरीके विकसित करना
हर बच्चे का व्यक्तिगत ग्रोथ डेटा तैयार कर उसके लिए अलग-अलग अध्ययन योजना बनाना
पैरेंट्स की भागीदारी बढ़ाना ताकि बच्चों का सीखने का माहौल मजबूत हो

शिक्षकों के उत्कृष्ट कार्य को सम्मानित करने के लिए टीचर ऑफ द मंथ जैसी पहल भी की गई, जिससे टीम भावना और नवाचार को बढ़ावा मिला।


⭐ बच्चों और शिक्षकों में बड़ा बदलाव

शुरुआत में नई शिक्षण पद्धतियों को लेकर छात्रों और शिक्षकों दोनों में हिचकिचाहट थी, लेकिन निरंतर प्रशिक्षण और प्रोत्साहन के बाद:
✔ बच्चों की पढ़ाई में रुचि तेजी से बढ़ी
✔ शिक्षकों ने नए-नए टीचिंग मॉडल अपनाए
✔ इमोशनल कनेक्शन बढ़ा जिससे सीखने में तेजी आई

सबसे बड़ा परिणाम—
👉 कक्षा 9वीं से 12वीं तक का रिजल्ट लगातार 100% आया


⭐ विश्व मंच पर सम्मान

वर्ल्ड एजुकेशन समिट में गजेंद्र सिंह राठौर के मॉडल पर आधारित ‘शून्य से शिखर तक’ पुस्तक का विमोचन हुआ। इस पुस्तक में एक सरकारी स्कूल द्वारा वैश्विक स्तर पर नवाचार कर नई ऊंचाइयों को छू लेने की पूरी यात्रा शामिल है।

टी-4 एजुकेशन के प्रमुख विकास पोटा ने कहा—

“यह मॉडल दुनिया को दिखाता है कि वास्तविक परिवर्तन कैसे समर्पण, रणनीति और सतत नवाचार से आता है।”


⭐ क्यों है यह उपलब्धि खास?

● सरकारी स्कूल से निकलकर वैश्विक मंच तक पहुंचा मॉडल
● लाखों शिक्षकों और स्कूलों के लिए प्रेरणा
● भारतीय शिक्षा की शक्ति को दुनिया ने सराहा
● बच्चों की सीखने की गति तीन गुना तक बढ़ी


निष्कर्ष

रतलाम के सांदीपनी स्कूल की यह उपलब्धि भारत की शिक्षा प्रणाली के लिए मील का पत्थर है। यह साबित करता है कि सही दृष्टिकोण, नई सोच और मजबूत नेतृत्व से सरकारी स्कूल भी विश्वस्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

उप प्राचार्य गजेंद्र सिंह राठौर और उनकी टीम न केवल शिक्षा जगत बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा बने हैं।

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