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सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: एमडीयू रोहतक में महिला सफाई कर्मियों से ‘मासिक धर्म का सबूत’ मांगने पर केंद्र व हरियाणा सरकार से जवाब तलब

Sir Ji Ki Pathshala

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के रोहतक स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) में घटी उस गंभीर घटना पर कड़ी नाराज़गी जताई है, जिसमें महिला सफाई कर्मियों से यह साबित करने के लिए अपने निजी अंगों की तस्वीरें भेजने को कहा गया था कि उन्हें मासिक धर्म हो रहा है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार, हरियाणा सरकार तथा विश्वविद्यालय प्रशासन को नोटिस जारी कर तत्काल जवाब मांगा है।


Supreme Court


जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने सुनवाई के दौरान बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “इस तरह का सबूत मांगना लोगों की सोच और मानसिकता को दर्शाता है।” जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि कुछ राज्यों में महिलाओं को मासिक धर्म अवकाश दिया जा रहा है—“क्या वहां भी इस अवकाश को लेने के लिए ऐसे सबूत मांगे जाएंगे?”


क्या है मामला?

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने महिला सफाई कर्मियों पर दबाव बनाया कि वे अपने निजी अंगों की तस्वीरें भेजकर यह साबित करें कि उन्हें पीरियड्स चल रहे हैं। कर्मचारियों ने इनकार किया तो उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी गई।


जांच और कार्रवाई

सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि—

  • मामले की जांच शुरू कर दी गई है
  • दो सुपरवाइजर और सहायक रजिस्ट्रार के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
  • पुलिस ने तीन लोगों पर यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया है।

बताया गया कि यह घटना 26 अक्टूबर को उस समय हुई, जब हरियाणा के राज्यपाल विश्वविद्यालय का दौरा करने वाले थे।


पीड़ित सफाई कर्मियों का आरोप

विश्वविद्यालय में 11 वर्षों से कार्यरत एक महिला सफाई कर्मचारी ने कहा—

“मासिक धर्म के कारण तबीयत ठीक नहीं थी, इसलिए हम सामान्य गति से काम नहीं कर पा रहे थे।
अधिकारियों ने तस्वीरें भेजने को कहा। मना करने पर गाली-गलौज की गई और नौकरी से निकालने की धमकी दी गई।”


सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

जस्टिस नागरत्ना ने कहा—
“यह घटना महिलाओं की गरिमा, सम्मान और निजता का खुला उल्लंघन है। यदि किसी कार्य को तेजी से करने की जरूरत थी, तो दूसरे कर्मियों को लगाया जा सकता था।”


याचिका में क्या मांग की गई?

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने केंद्र और हरियाणा सरकार से मांग की है कि—

  • इस घटना की व्यापक और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
  • ऐसे दिशा-निर्देश बनाए जाएँ कि माहवारी के दौरान महिलाओं के स्वास्थ्य, सम्मान, निजता और स्वतंत्रता पर कोई आंच न आए।

अगली सुनवाई

इस मामले पर अब 16 दिसंबर को अगली सुनवाई होगी।



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