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हाईकोर्ट का सख्त रुख: जाली दस्तावेज़ से मिली नौकरी वर्षों की सेवा के बाद भी शून्य, याचिका खारिज

Sir Ji Ki Pathshala

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि फर्जी या जाली दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त नौकरी कई वर्षों की सेवा के बाद भी वैध नहीं मानी जाएगी। कोर्ट ने कहा कि “धोखाधड़ी पूरी प्रक्रिया को दूषित कर देती है और गलत तरीके से हासिल की गई नियुक्ति को लंबी सेवा भी वैध नहीं बना सकती।”

न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए दीपा मैगलीना द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में निलंबन और वेतन रोकने के आदेश को चुनौती दी गई थी।


High Court Decision


📌 मामला: 1991 में नौकरी, 2015 में नियमितीकरण और फिर फर्जी प्रमाणपत्र का खुलासा

दीपा मैगलीना मुरादाबाद के सेंट जोसेफ गर्ल्स जूनियर हाईस्कूल में 1991 से कार्यरत थीं। वर्ष 2015 में स्कूल को अनुदान प्राप्त स्कूलों की सूची में शामिल कर लिया गया, जिसके बाद याची ने सहायक अध्यापिका पद पर नियमित नियुक्ति प्राप्त की।

बाद में आई एक शिकायत पर जांच की गई, जिसमें उनका टीईटी प्रमाणपत्र फर्जी पाया गया। रिपोर्ट में सामने आया कि —

  • उन्होंने टीईटी में 91 अंक प्राप्त करने का दावा किया
  • जबकि सत्यापन में पता चला कि उन्होंने केवल 63 अंक प्राप्त किए थे

इसके आधार पर उन्हें निलंबित कर दिया गया और वेतन रोक दिया गया।


📌 याची की दलील: अल्पसंख्यक संस्थान को टीईटी से छूट

याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि—

  • नियुक्ति मूल रूप से 1991 में हुई थी
  • स्कूल अल्पसंख्यक संस्थान है, इसलिए टीईटी आवश्यक नहीं
  • 2015 में स्कूल अनुदान सूची में शामिल हुआ, अतः पूर्व नियुक्ति मान्य होनी चाहिए

📌 राज्य की दलील: 2015 में टीईटी अनिवार्य, फर्जी दस्तावेज़ का इस्तेमाल

राज्य के अधिवक्ताओं ने कहा कि—

  • 2015 के विज्ञापन के तहत आवेदन किया गया था
  • उस समय टीईटी अनिवार्य योग्यता थी
  • याची ने गलत अंकों वाला फर्जी टीईटी प्रमाणपत्र लगाया
  • जालसाजी करते हुए नौकरी हासिल करना दंडनीय है

📌 कोर्ट का फैसला: नौकरी अवैध, याचिका खारिज

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि—

  • जाली दस्तावेज़ के सहारे प्राप्त नौकरी वैध नहीं हो सकती
  • चाहे सेवा अवधि कितनी भी लंबी क्यों न हो
  • धोखाधड़ी की वजह से नियुक्ति “शून्य (Void ab initio)” मानी जाएगी
  • इसलिए निलंबन और वेतन रोकने का आदेश सही है

अंततः कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

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