देशभर के प्राथमिक विद्यालयों में 28 जून 2018 के बाद बीएड के आधार पर नियुक्त सरकारी शिक्षकों के लिए छह महीने का अनिवार्य ब्रिज कोर्स शुरू करने की प्रक्रिया एक बार फिर उलझ गई है।
राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) ने ब्रिज कोर्स के लिए आधिकारिक पोर्टल https://bridge.nios.ac.in/ तो शुरू कर दिया है, लेकिन उत्तर प्रदेश में 69,000 सहायक अध्यापक भर्ती के तहत बीएड योग्यता पर चयनित 30,000 से अधिक शिक्षकों को अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वे आवेदन कैसे करें।

प्रदेश सरकार ने इस मामले में उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दायर करके बताया था कि ब्रिज कोर्स के लिए 1 से 15 नवंबर तक ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे और 1 दिसंबर से छह महीने का प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा। हालांकि, आवेदन प्रक्रिया अब तक शुरू ही नहीं हो सकी है, जिससे शिक्षकों में भारी असमंजस है।
बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने 15 अक्टूबर को एनआईओएस के माध्यम से प्रशिक्षण कराने का प्रस्ताव विशेष सचिव, बेसिक शिक्षा को भेजा था, लेकिन अब तक कोई आदेश जारी नहीं हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से आदेश दिया है कि 28 जून 2018 से 11 अगस्त 2023 के बीच नियुक्त बीएड प्रशिक्षित शिक्षकों को ब्रिज कोर्स अनिवार्य रूप से पूरा करना होगा। शिक्षकों को ब्रिज कोर्स शुरू होने की तारीख से एक वर्ष के भीतर इस प्रशिक्षण को एक ही बार में पूरा करना होगा। कोर्स पूरा न करने पर उनकी नियुक्ति अमान्य हो जाएगी, जो शिक्षकों के लिए बड़ा जोखिम है।
एनआईओएस द्वारा संचालित यह छह महीने का प्राथमिक शिक्षा प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम (ब्रिज कोर्स) को एनसीटीई से 2 जुलाई 2025 को मान्यता मिली थी। अब शिक्षकों की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि आवेदन प्रक्रिया शुरू होने में हो रही देरी उनके भविष्य को सीधे प्रभावित कर सकती है।
