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टीईटी अनिवार्यता के विरोध में सैकड़ों शिक्षक सड़क पर, सांसद को सौंपा ज्ञापन — नौकरी संकट पर जताई गहरी चिंता

Sir Ji Ki Pathshala

रामपुर। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किए जाने के आदेश के खिलाफ शिक्षकों का विरोध तेज हो गया है। बुधवार को राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के बैनर तले जिले भर से आए सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाओं ने आंबेडकर पार्क में जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षकों का कहना है कि यह निर्णय लाखों शिक्षकों की नौकरी और आजीविका पर सीधा संकट पैदा कर रहा है।


टीईटी अनिवार्यता प्रकरण


धरने का नेतृत्व महासंघ के जिलाध्यक्ष रवेंद्र गंगवार ने किया। जिला महामंत्री विपेंद्र कुमार ने कहा कि उच्चतम न्यायालय द्वारा आरटीई एक्ट में 10 अगस्त 2017 के संशोधन को लागू करते हुए, अब देशभर के सभी सेवारत प्राथमिक व उच्च प्राथमिक शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह आदेश शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों दोनों के लिए गंभीर संकट पैदा करेगा।

जिला उपाध्यक्ष सोनी गुप्ता ने बताया कि एनसीटीई की गाइडलाइंस के अनुसार बड़ी संख्या में वर्तमान शिक्षक आयु सीमा और अन्य मानकों के कारण टीईटी देने के लिए पात्र ही नहीं हैं। ऐसे में उन सभी को परीक्षा के लिए बाध्य करना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।

सांसद को सौंपा ज्ञापन, टीईटी से छूट की मांग

प्रदर्शन के बाद शिक्षक प्रतिनिधिमंडल ने संभल के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी से मुलाकात की और ज्ञापन सौंपकर मांग की कि संसद में इस मुद्दे को मजबूती से उठाया जाए। उन्होंने कहा कि सेवारत शिक्षकों को टीईटी से तत्काल छूट दी जाए, ताकि उनके रोजगार पर संकट न आए।

धरने में हंसराज पटेल, नरेंद्र पाठक, चिरंजीव कुमार, राकेश कुमार, अनीता शर्मा सहित बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।

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