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शिक्षकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ठोस नियम बनाएं व डिजिटल उपस्थिति प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू करें : इलाहाबाद हाईकोर्ट

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शिक्षकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ठोस नियम बनाएं व डिजिटल उपस्थिति प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू करें : इलाहाबाद हाईकोर्ट

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की अनुपस्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने इसे बच्चों की मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की एकल पीठ ने बांदा के प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका इंदिरा देवी के निलंबन आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका पर राहत देने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार के मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव (बेसिक शिक्षा ), महानिदेशक स्कूल शिक्षा, निदेशक बेसिक शिक्षा और जिला वेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिक्षकों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ठोस नियम बनाएं और डिजिटल उपस्थिति प्रणाली को प्रभावी रूप से लागू करें।

High Court | Online Attendance

अपने पारित विस्तृत आदेश में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गुरु की महिमा का बखान करते हुए उद्धित किया गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वराः, गुरु साक्षात परम ब्रह्मा, तस्मै श्री गुरुवे नमः । साथ ही यह भी कहा कि शिक्षकों के स्कूलों में न जाने से बच्चों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। गरीब बच्चे प्राइवेट ट्यूशन का खर्च नहीं उठा सकते। शिक्षकों की गैरहाजिरी के चलते स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति दिनों दिन कम होती जा रही है। बच्चे ही देश के भविष्य हैं। फिलहाल हाईकोर्ट इस याचिका पर 30 अक्तूबर को पुनः सुनवाई करेगा।

30 अगस्त को बांदा के डीएम ने दोपहर में उच्च प्राथमिक विद्यालय पायलानी कंपोजिट, विकास क्षेत्र तिंदवारी का निरीक्षण किया। उस दौरान इंदिरा देवी नहीं थीं जबकि उपस्थिति पंजिका में उनके सुबह के हस्ताक्षर थे। निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि अधिकांश स्टाफ ने बिना किसी सूचना के या विभागीय नियमों के अनुसार ऑनलाइन माध्यम से कोई अवकाश नहीं लिया था। वहीं, किसी भी स्टाफ की ओर से ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से अवकाश संबंधी कोई विवरण दर्ज नहीं किया गया था। इसके अलावा दोपहर डेढ़ बजे तक पढ़ने वाले छात्रों की उपस्थिति भी दर्ज नहीं की गई थी। इसे अत्यंत लापरवाहीपूर्ण मानते हुए प्रधानाध्यापिका को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया। इसके बाद दंडात्मक कार्रवाई की संस्तुति कर दी। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

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