RTE संशोधन 2017, TET की अनिवार्यता और NCTE गाइडलाइन: शिक्षकों के अधिकार, भ्रम और न्याय की राह
केंद्र द्वारा 2017 में जारी नोटिफिकेशन ही सारे विवाद की जड़ है ।The Right of Children to free and compulsary Education) Amendment) Act 2017.
मामला तमिलनाडु और महाराष्ट्र सरकार का है जिसने टेट में अल्पसंख्यक स्कूलों के लिए रिलैक्सेशन मांगा था। 31 मार्च 2015 मे केंद्र सरकार ने तमिलनाडु सरकार को 4 साल के लिए यानी 1 अप्रैल 2019 तक के लिए टेट में छूट दे दी गई थी। पर जब एक याचिकाकर्ता स्टीफेन अल्पसंख्यक स्कूल तमिलनाडु से Tet में छूट मांगने के लिए कोर्ट गया तो सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से स्टैंड पूछा कि आपका क्या स्टैंड है? तब बताया कि सेंट्रल गवर्नमेंट ने वर्ष 2017 ,अगस्त में एक Right to free and compulsary Education कॉन्स्टिट्यूशन Amendment Act ,proviso पास किया (under sec 23 sub sec 2) कि जो शिक्षक 31 मार्च 2015 तक नियुक्ति हुए हैं उनके लिए न्यूनतम योग्यता (TET) पास करना अनिवार्य है। in order to continue their service with in five year from the commencement of Right of children free and compulsary Education Amendment Act 2017, के आधार पर यह नोटिफिकेशन केंद्र सरकार के सेक्रेटरी ने स्टेट सेक्रेटरी को भेजा, पर स्टेट सेक्रेटरी ने यह नोटिफिकेशन Regulatory Authority के माध्यम से Substututary bodies को Publish नहीं कराया। अब बात करते हैं कोर्ट की। कोर्ट ने हमें यानी कि शिक्षकों को डुबाया या बचाया है। कोर्ट ने 2 साल का और समय दिया है कि जिन शिक्षकों के सेवा के 5 साल से ज्यादा का समय बचा है वह TET क्वालीफाई कर ले। यह निर्णय केंद्र सरकार के Right to free and compulsory Amendment Act 2017 के संदर्भ में है।जबकि केंद्र सरकार ने अगस्त 2017 में ही अमेंडमेंट कर कॉन्स्टिट्यूशन में बिल पारित करवा दिया था कि मिनिमम योग्यता टीईटी अनिवार्य है।

अब बात करते हैं एनसीटीई की, जो कहती है -
- वर्ष 03.09.2001 से 23.08.2010 तक नियुक्त शिक्षक 2001 Regulations के अनुसार योग्य माने जाएंगे, TET की आवश्यकता नहीं।
- वर्ष 23.08.2010 से 29.07.2011 तक नियुक्त शिक्षक इनको TET पास करना अनिवार्य है (RTE Act लागू होने के बाद से)।
- वर्ष 29.07.2011 के बाद नियुक्त शिक्षक संशोधित नियमों के तहत TET अनिवार्य है।
NCTE का वर्तमान स्टैंड
- पुराने शिक्षक (2001 से पहले वाले) पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
- वर्ष 2001–2010 के बीच नियुक्त शिक्षक 2001 नियमों के हिसाब से मान्य रहेंगे।
- वर्ष 2010 के बाद से नियुक्त शिक्षक बिना TET के न तो भर्ती हो सकते हैं और न पदोन्नति पा सकते हैं।
- सेवारत अप्रशिक्षित शिक्षकों को 31.03.2019 तक न्यूनतम योग्यता हासिल करनी थी, अन्यथा सेवा में नहीं रह सकते।
सबसे महत्वपूर्ण
- TET 23 अगस्त 2010 के बाद से अनिवार्य
- Promotion (पदोन्नति) के लिए भी TET अनिवार्य (2014 से लागू)
- Relaxation (छूट) अब किसी को नहीं मिलेगी (खासकर कक्षा I–VIII के शिक्षकों को)
अब बात करते हैं प्रमोशन की। प्रमोशन में खुद NCTE ने वर्ष 2014 में अपनी Guideline में लिखा है कि from one level to next level अर्थात प्राइमरी से जूनियर में जाने के लिए टीईटी अनिवार्य है।
पर वजारात NCTE की Guidelines को दरकिनार कर रही थी, जिस पर Double Bench में नियमों के मुताबिक आपत्ति डाली गई है।
अब बताइए क्या गलत किया डबल बेच में केस डालकर और क्या गलत किया कल जज साहब ने अपना निर्णय सुना कर। सब कुछ केंद्र सरकार ने पहले ही अपने एक्ट Right to free and compulsory Amendment act 2017 में लिख रखा है ,Tet Compulsory और NCTE ने भी अपनी गाइडलाइन 2014 में लिख रखा है। Tet compulsory from one level to next level i.e promotion.
जब पिछले प्रकरण के बारे में नहीं पता तो फर्जी की सीटी व र्नौटंकी ना करे। और खुद बोला है कि इसमें कोई भी शिक्षक कोर्ट ना जाए, और राज्य सरकारों व केंद्र सरकार को पार्टी बनकर ही Atorney Genral से मिले शिक्षक संध के अधिकारी।
अधूरा ज्ञान से व्यक्ति खुद को ज्ञानी समझते हुए दूसरों पर आरोप ही लगता है।
धन्यवाद

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