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सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापकों के 1504 और प्रधानाध्यापकों के 390 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चार साल बाद पूरी होगी।

Sir Ji Ki Pathshala

सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापकों के 1504 और प्रधानाध्यापकों के 390 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चार साल बाद पूरी होगी।  

  • शासन ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा को प्रक्रिया पूरी करने को कहा
  • आरक्षण पर तस्वीर साफ नहीं, इसलिए भर्ती में लगेगा समय

सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापकों के 1504 और प्रधानाध्यापकों के 390 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चार साल बाद पूरी होगी। शासन के संयुक्त सचिव (बेसिक शिक्षा अनुभाग) वेद प्रकाश राय ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा को 19 सितंबर को भेजे पत्र में उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त (जूनियर हाईस्कूल) (अध्यापकों की भर्ती एवं सेवा की शर्ते) नियमावली-1978, (सातवां संशोधन) नियमावली-2019 में दी गई व्यवस्था एवं वर्तमान आरक्षण नियमों का पालन करते हुए तथा सभी विधिक पहलुओं का परीक्षण कर नियमानुसार चयन प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

इस भर्ती के लिए 17 अक्तूबर 2021 को लिखित परीक्षा कराई गई थी। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप पर 15 नवंबर 2021 को परिणाम घोषित होने के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने कम अंक मिलने की शिकायत करते हुए याचिकाएं कर दी थीं। हाईकोर्ट के आदेश पर शासन ने 12 अप्रैल 2022 को एक समिति का गठन करते हुए आपत्तियों की जांच कराई। 571 शिकायतों के मिलान में 132 शिकायतें सही पाई गई थीं। पुनर्मूल्यांकन करते हुए परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय ने छह सितंबर 2022 को संशोधित परिणाम जारी किया था।इसमें सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में सम्मिलित 271071 अभ्यर्थियों में से 42066 जबकि प्रधानाध्यापकों की भर्ती के लिए 14,931 अभ्यर्थियों में से 1544 को सफल घोषित किया गया था। कुछ अभ्यर्थियों ने संशोधित परिणाम को भी चुनौती दी थी लेकिन हाईकोर्ट ने 15 फरवरी 2024 को सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए भर्ती प्रक्रिया को पूर्ण कराने के आदेश दिए थे।

शासन ने भले ही एडेड जूनियर हाईस्कूलों की शिक्षक और प्रधानाध्यापक भर्ती पूरी करने के आदेश दिए हैं, लेकिन इसमें समय लगेगा। दरअसल, बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने 29 अप्रैल और 15 जुलाई 2025 को भेजे पत्र में आरक्षण समेत कई बिन्दुओं पर उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन मांगा था। हालांकि 19 सितंबर के पत्र में संयुक्त सचिव ने शंका का समाधान किए बगैर भर्ती पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इस भर्ती में पिछले तीन सालों से आरक्षण का मामला ही पेचीदा बना हुआ है। मूल शासनादेश में यह साफ नहीं था कि भर्ती के किस स्तर पर आरक्षण लागू होगा।