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निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 21 के अन्तर्गत 06-14 वर्ष तक के बच्चों को कक्षा-8 तक की निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने हेतु उoप्रo शासन द्वारा 'उत्तर प्रदेश निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियमावली, 2011' प्रख्यापित की गयी है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 एवं उत्तर प्रदेश नियमावली, 2011 के मुख्य बिंदु
- 06 से 14 वर्ष की आयु के समस्त बच्चों को प्रारम्भिक शिक्षा (कक्षा 1 से 8 तक) पूरा करने हेतु अपने पड़ोस के विद्यालय में निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है अर्थात बच्चे की शिक्षा के लिए किसी प्रकार का शुल्क या खर्च नहीं देना होगा ।
- ऐसा बच्चा जिसकी उम्र 6 साल से ऊपर है और वह किसी विद्यालय में नहीं पढ़ रहा है अथवा कक्षा-8 तक की अपनी प्रारम्भिक शिक्षा पूरी नहीं कर पाया है, उसे उसकी उम्र के अनुरूप उचित कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा। इसके साथ ही उसे अन्य बच्चों के समकक्ष लाने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जायेगा।
- उम्र के सबूत के अभाव में भी बच्चे को विद्यालय में प्रवेश पाने का अधिकार होगा । निम्न दस्तावेज़ों में से किसी एक दस्तावेज़ को बच्चे की आयु के प्रमाण के रुप में समझा जायेगा - (1) अस्पताल या सहायक नर्स एवं मिड वाइफ का जन्म पंजी अभिलेख (2) आँगनबाड़ी का अभिलेख, (3) जन्म एवं मृत्यु सम्बन्धी ग्राम पंजी, (4) माता-पिता या अभिभावक द्वारा शपथ पत्र के माध्यम से बच्चे की आयु की घोषणा।
- प्रवेश हेतु जन्म प्रमाण पत्र एवं स्थानांतरण प्रमाण पत्र की बाध्यता नहीं है। बच्चे को एक विद्यालय से दूसरे विद्यालय में स्थानांतरण का अधिकार है।
- अलाभित समूह एवं दुर्बल वर्ग के बच्चों के लिए सभी गैर सहायतित मान्यता प्राप्त विद्यालयों की पहली कक्षा में दाखिला लेने के लिए 25 फीसदी सीटों तक का आरक्षण ।
- कक्षा 1-8 तक की प्रारम्भिक शिक्षा पूर्ण होने से पहले किसी भी बच्चे को कक्षा में फेल नहीं किया जायेगा, तथा निकाला नहीं जाएगा।
- किसी भी बच्चे का दाखिला लेने के समय स्क्रीनिंग टेस्ट अथवा कैपिटेशन फीस नहीं लिया जाएगा।
- प्रारम्भिक शिक्षा पूरा करने वाले विद्यार्थियों को एक प्रमाण पत्र दिया जाएगा।
- बच्चों को शारीरिक दण्ड देना एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित करना प्रतिबंधित है।
- सभी मौसमों के लिए उपयुक्त भवन, प्रत्येक शिक्षक के लिए कम से कम एक कक्षा कक्ष, कार्यालय-सह- भंडार-सह-प्रधानाध्यापक कक्ष; बाधा मुक्त पहुँच बालक एवं बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय; सभी बच्चों के लिए सुरक्षित और पर्याप्त पेय जल की सुविधा; रसोई घर जहाँ विद्यालय मध्याह्न भोजन पकाया जाएगा; खेल का मैदान; चाहरदीवारी ।
- दशकीय जनगणना, चुनाव एवं आपदा राहत को छोड़कर शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाना प्रतिबंधित है।
- शिक्षकों को विद्यालय में उपस्थित होने में नियमितता और समय पालन करना है।
- शिक्षक द्वारा सम्पूर्ण पाठ्यक्रम एवं विषयों का शिक्षण पूरा करना ।
- बच्चों के अधिकारों का यदि कहीं किसी प्रकार का उल्लघंन होता है तो उसकी प्रथम शिकायत स्थानीय प्राधिकारी से की जा सकती है। इसके पश्चात राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग तथा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग से की जा सकती है।
विद्यालय प्रबन्ध समिति की संरचना, गठन, कार्यकाल एवं कार्य
विद्यालय प्रबंध समिति के माध्यम से अभिभावकों की विशेष भूमिका और दायित्व निर्धारित किया गया हैं। शिक्षक का दायित्व है कि विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्यों को समय-समय पर विद्यालय की कार्यप्रणाली, विभिन्न प्रावधानों और कार्यक्रमों आदि पर जागरूक करें तथा जोड़ने का प्रयास करें। विद्यालय प्रबंध समिति एवं शिक्षक एक साथ मिलकर काम करें, जिससे अभिभावकों एवं समुदाय को बच्चों की शिक्षा के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा सके।
संरचना
- विद्यालय प्रबंध समिति के 11 अभिभावक सदस्यों में एक-एक सदस्य अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछडा वर्ग तथा कमजोर वर्ग के बच्चे के माता-पिता होंगे।
- विद्यालय प्रबंध समिति के 11 सदस्यों का बैठक में आम सहमति से चुनाव करने के उपरान्त, चयनित 11 सदस्य अपने में से अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चुनाव आपसी सहमति से करेंगे। अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष में से किसी एक पद पर महिला को चुना जायेगा।
कार्यकाल
- विद्यालय प्रबंध समिति का कार्यकाल दो वर्ष का होगा। दो वर्ष के उपरान्त नवीन विद्यालय प्रबंध समिति का गठन किया जायेगा ।
- माह अप्रैल में विद्यालय प्रबन्ध समिति के अभिभावक सदस्यों को अद्यतन ( बच्चों द्वारा विद्यालय छोड़ने/कक्षा उत्तीर्ण होने की स्थिति में) किया जायेगा ।
- विद्यालय प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष बदल जाने की स्थिति में अथवा प्रधानाध्यापक के स्थानान्तरण की स्थिति में खाता संचालन में यथा आवश्यक संशोधन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की अनुमति से किया जायेगा।
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