देहरादून। उत्तराखंड में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर चिंता का सामना कर रहे 20 हजार से अधिक शिक्षकों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। राज्य सरकार सेवारत शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी आयोजित कराने की तैयारी कर रही है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विभागीय अधिकारियों को इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
विभागीय अधिकारी विशेष टीईटी का प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेजेंगे। शासन स्तर पर मंजूरी मिलने के बाद ही परीक्षा आयोजित कराने, पात्रता और आवेदन प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है। उत्तराखंड में प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल के साथ अन्य प्रभावित शिक्षक संवर्गों में भी इसको लेकर चिंता बनी हुई है।
31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करने की समयसीमा
उपलब्ध समाचार विवरण के अनुसार, निर्धारित समयसीमा तक टीईटी उत्तीर्ण करना प्रभावित शिक्षकों के लिए जरूरी हो सकता है। इस समयसीमा के संदर्भ में विशेष टीईटी आयोजित कराने का विकल्प तैयार किया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग शिक्षक संवर्गों पर नियमों की प्रयोज्यता संबंधित न्यायिक आदेशों और सेवा नियमों के अनुसार तय होगी।
20 हजार से अधिक शिक्षकों को मिल सकता है अवसर
उत्तराखंड में प्राथमिक शिक्षा के करीब 12 हजार और माध्यमिक शिक्षा के लगभग 7 से 8 हजार शिक्षकों के प्रभावित होने की आशंका बताई गई है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे शिक्षकों की है, जिनकी उम्र 55 वर्ष या उससे अधिक है।
विशेष टीईटी आयोजित होने पर पात्रता संबंधी समस्या का सामना कर रहे शिक्षकों को परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिल सकता है। इससे उन शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से सेवा में हैं और टीईटी की अनिवार्यता को लेकर चिंतित हैं।
अब शासन के फैसले का इंतजार
शिक्षा मंत्री के निर्देश के बाद अब विभागीय प्रस्ताव और शासन की मंजूरी महत्वपूर्ण होगी। विशेष टीईटी की तारीख, आवेदन प्रक्रिया, परीक्षा का पाठ्यक्रम और पात्रता संबंधी विस्तृत जानकारी आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद ही सामने आएगी।
फिलहाल विशेष टीईटी कराने की तैयारी से शिक्षकों में राहत की उम्मीद जगी है।


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