लखनऊ। उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की नियमित निगरानी के साथ अब उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता के आधार पर रेटिंग भी की जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग संस्थानों के प्रदर्शन का आकलन उपलब्ध आंकड़ों और स्थलीय निरीक्षण के आधार पर करेगा। इसके बाद संस्थानों को ग्रीन, अंबर और रेड श्रेणी में रखा जाएगा।
विभाग के अनुसार, फिलहाल इस रेटिंग व्यवस्था का डिजिटल स्तर पर प्रयोग नहीं किया जाएगा। इसके लिए नोडल अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो समय-समय पर विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों का स्थलीय निरीक्षण करेंगे।
डेटा और अभिलेखों का होगा भौतिक सत्यापन
नोडल अधिकारी संस्थानों की ओर से उपलब्ध कराए गए डेटा और अभिलेखों का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन करेंगे। इसके बाद संस्थान के प्रदर्शन और निर्धारित मानकों के आधार पर उसकी रेटिंग तय की जाएगी।
ग्रीन श्रेणी में बेहतर व्यवस्था और संतोषजनक प्रदर्शन करने वाले संस्थानों को रखा जाएगा। अंबर श्रेणी में ऐसे संस्थान शामिल होंगे जो निर्धारित योजना और अपेक्षाओं के अनुरूप काम नहीं कर रहे हैं। वहीं रेड श्रेणी में गंभीर कमियों वाले संस्थानों को रखा जाएगा।
लगातार खराब प्रदर्शन करने वाले संस्थानों की कमियों और समस्याओं की जांच कर आवश्यक सुधार कराया जाएगा। अगली समीक्षा के दौरान यह भी देखा जाएगा कि संबंधित संस्थान ने दिए गए निर्देशों का कितना अनुपालन किया है।
छह प्रमुख क्षेत्रों में होगी गुणवत्ता की जांच
उच्च शिक्षा विभाग ने संस्थानों की निगरानी के लिए छह प्रमुख क्षेत्रों को आधार बनाया है। इनमें स्टूडेंट आउटकम एंड एकेडमिक डिलीवरी, डिजिटल आइडेंटिटी, एबीसी एवं क्रेडेंशियल, रिसर्च-इनोवेशन एंड इंडस्ट्री लिंकेज, क्वालिटी एंड एक्रीडिटेशन तथा गवर्नेंस-कम्पलायंस एंड सर्विस डिलीवरी शामिल हैं।
इसके साथ ही फाइनेंस, पीपुल एंड ऑपरेशन से संबंधित व्यवस्थाओं को भी निगरानी के दायरे में रखा गया है।
छात्रों की उपस्थिति से लेकर शिक्षण कार्य तक की होगी जांच
संस्थानों के निरीक्षण में केवल कागजी रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक गतिविधियों की वास्तविक स्थिति भी देखी जाएगी। इसके तहत छात्रों की उपस्थिति, शैक्षणिक सहभागिता, एकेडमिक कैलेंडर, टाइम टेबल और नियमित शिक्षण कार्य की समीक्षा की जाएगी।
विभाग यह भी देखेगा कि संस्थान में निर्धारित शैक्षणिक गतिविधियां समयबद्ध तरीके से संचालित हो रही हैं या नहीं।
NAAC, IQAC और NIRF पर भी नजर
गुणवत्ता मूल्यांकन में NAAC, IQAC और NIRF से संबंधित गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा शोध प्रकाशन, शोध परियोजनाओं और संस्थान में चल रही रिसर्च गतिविधियों की स्थिति भी जांची जाएगी।
इससे विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शोध एवं गुणवत्ता सुधार से जुड़े कार्यों को बढ़ावा देने की कोशिश की जाएगी।
डिजिटल शिक्षा और ई-कंटेंट की भी होगी समीक्षा
निरीक्षण के दौरान संस्थानों में डिजिटल शिक्षा की स्थिति भी देखी जाएगी। इसमें ई-कंटेंट, LMS, डिजिटल शिक्षण तथा अन्य डिजिटल शैक्षणिक व्यवस्थाओं की प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा।
विभाग यह भी देखेगा कि संस्थान विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षण की सुविधाएं कितनी प्रभावी तरीके से उपलब्ध करा रहे हैं।
उद्योग से जुड़ाव और प्लेसमेंट भी रेटिंग का हिस्सा
विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के उद्योग आधारित पाठ्यक्रम, एमओयू, इंटर्नशिप और प्लेसमेंट की स्थिति भी जांची जाएगी। इसके साथ छात्र सहायता और छात्रवृत्ति से जुड़ी प्रगति को भी गुणवत्ता मूल्यांकन में शामिल किया गया है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य संस्थानों के प्रदर्शन को केवल शैक्षणिक परिणामों तक सीमित न रखते हुए शिक्षण, शोध, डिजिटल शिक्षा, उद्योग से जुड़ाव, प्रशासन और छात्र सुविधाओं के व्यापक आधार पर देखना है।
KPI के आधार पर होगा प्रदर्शन का आकलन
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित विभिन्न क्षेत्रों की गुणवत्ता को परफॉर्मेंस इंडिकेटर (KPI) के आधार पर भी देखा जाएगा। इन संकेतकों के माध्यम से संस्थानों के प्रदर्शन का तुलनात्मक और नियमित मूल्यांकन करने की व्यवस्था तैयार की जा रही है।
विभाग ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों और उच्च शिक्षा निदेशक को इस संबंध में आवश्यक निर्देश दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत नियमित निगरानी के जरिए कमजोर प्रदर्शन वाले संस्थानों की कमियों की पहचान कर उनमें सुधार कराने पर जोर दिया जाएगा।


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