प्रयागराज। मृतक आश्रित कोटे के तहत होने वाली नियुक्तियों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा के आधार पर स्वीकृत पद पर की गई नियुक्ति को केवल नियुक्ति पत्र में किसी शर्त के आधार पर पूरी तरह अस्थायी नहीं बनाया जा सकता। नियुक्ति पत्र में ऐसी शर्त जोड़ना, जिसके तहत कर्मचारी की सेवा बिना कारण बताए किसी भी समय समाप्त की जा सके, कानूनन उचित नहीं है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने आगरा की सपना सारस्वत की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि याची को 27 अगस्त को नियुक्ति पत्र जारी कर दिया गया था। हालांकि, नियुक्ति पत्र की पहली शर्त को लेकर याची के अधिवक्ता कमल कुमार केसरवानी ने आपत्ति दर्ज कराई।
अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि नियुक्ति पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि नियुक्ति पूर्णतः अस्थायी है और इसे बिना कोई कारण बताए किसी भी समय समाप्त किया जा सकता है। इस पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि मृतक आश्रित के आधार पर की जाने वाली नियुक्ति में ऐसी शर्त आखिर किस आधार पर शामिल की गई।
कोर्ट ने कहा कि ऐसी शर्त स्थापित कानूनी सिद्धांतों के विपरीत है। सुनवाई के दौरान अपर महाधिवक्ता अमित सक्सेना ने भी माना कि नियुक्ति पत्र में इस तरह की शर्त शामिल किया जाना अनुचित और कानूनन गलत है।
अपर महाधिवक्ता ने बताया कि प्रदेश के लगभग सभी सरकारी विभागों में नियुक्ति के लिए एक निर्धारित प्रारूप का इस्तेमाल किया जा रहा है और इसी प्रारूप के कारण यह शर्त नियुक्ति पत्र में शामिल हो गई। उन्होंने अदालत को भरोसा दिलाया कि मामले को शासन स्तर पर उठाया जाएगा, ताकि भविष्य में मृतक आश्रित कोटे से होने वाली नियुक्तियों में ऐसी शर्त न लगाई जाए।
राज्य सरकार की ओर से यह भी आश्वासन दिया गया कि याची को पुरानी आपत्तिजनक शर्त हटाकर संशोधित नियुक्ति पत्र जारी किया जाएगा। हाईकोर्ट ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए संबंधित अधिकारी को अगली सुनवाई तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि नियमित पद पर नियुक्ति के बावजूद नियुक्ति पत्र में अस्थायी सेवा की शर्त क्यों जोड़ी गई।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अगली सुनवाई के दौरान हलफनामे के साथ संशोधित नियुक्ति पत्र को रिकॉर्ड पर प्रस्तुत किया जाए। कोर्ट की इस टिप्पणी से मृतक आश्रित कोटे के तहत नियुक्त होने वाले कर्मचारियों के सेवा अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट हुई है।


सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म