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यूपी के 16 हजार प्राथमिक स्कूलों में बनेंगे ‘खाद्य वन’, बच्चों को पढ़ाई के साथ मिलेगा प्राकृतिक पोषण

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में अब बच्चों को किताबों के साथ प्रकृति और पोषण से जोड़ने की तैयारी है। योगी सरकार प्रदेश के स्कूल परिसरों में ‘खाद्य वन’ (फ्रूट फॉरेस्ट) विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। इसके तहत विद्यालयों में फलदार पौधे लगाए जाएंगे, ताकि बच्चे पौधों की देखभाल के साथ उनके महत्व और प्राकृतिक पोषण को भी करीब से समझ सकें।

UP School Food Forest

पहले चरण में 16 हजार स्कूलों का चयन

योजना के पहले चरण में प्रदेश के करीब 16,000 प्राथमिक विद्यालयों को चिह्नित किया गया है। इन स्कूलों में उपलब्ध भूमि का उपयोग फलदार पौधे लगाने के लिए किया जाएगा। पौधों के चयन में स्थानीय जलवायु और विद्यालय के वातावरण को ध्यान में रखा जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य केवल स्कूल परिसर में हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि बच्चों को पौधों के माध्यम से व्यावहारिक और अनुभव आधारित शिक्षा देना भी है।

स्कूल परिसर बनेगा ‘पोषण की जीवंत पाठशाला’

खाद्य वन विकसित होने के बाद बच्चे फलदार पौधों को केवल किताबों में पढ़ने के बजाय उन्हें अपने स्कूल परिसर में बढ़ते हुए देख सकेंगे। पौधों में फूल आने, फल लगने और उनके विकास की प्रक्रिया को बच्चे प्रत्यक्ष रूप से समझ पाएंगे।

स्कूलों में तैयार होने वाले फलों का उपयोग बच्चों के पोषण के लिए भी किया जा सकेगा। इससे विद्यालय परिसर में ही प्राकृतिक खाद्य स्रोत विकसित करने में मदद मिलेगी।

बच्चों को दी जाएगी पौधों की जिम्मेदारी

इस योजना में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित करने की तैयारी है। बच्चों को उनकी कक्षा और उम्र के अनुसार पौधों की देखभाल से जुड़ी जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं।

वे पौधों में पानी देने, उनकी वृद्धि पर नजर रखने और उनके संरक्षण जैसी गतिविधियों में हिस्सा लेंगे। इससे बच्चों में ‘एक पेड़ लगाओ’ के साथ ‘एक पेड़ पालो’ की भावना विकसित करने में मदद मिलेगी।

स्थानीय प्रजातियों को मिलेगी प्राथमिकता

खाद्य वन के लिए ऐसे फलदार पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो संबंधित क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुकूल हों। स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाने से उनके बेहतर विकास और रखरखाव की संभावना बढ़ेगी।

नियमित देखभाल के साथ आने वाले वर्षों में ये स्कूल परिसर हरियाली, पोषण, पर्यावरण शिक्षा और व्यावहारिक सीखने के केंद्र के रूप में विकसित हो सकते हैं।

पढ़ाई के साथ पर्यावरण और पोषण की शिक्षा

सरकार की यह पहल विद्यालयों में उपलब्ध जमीन के बेहतर उपयोग के साथ बच्चों को प्रकृति से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। खाद्य वन के माध्यम से बच्चों को पौधों की देखभाल, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक पोषण के बारे में व्यवहारिक जानकारी मिलेगी।

इस तरह प्राथमिक स्कूलों में बनने वाले ये खाद्य वन बच्चों के लिए ककहरा सीखने के साथ फलदार पेड़ों की पाठशाला भी बन सकेंगे।

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