प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में लंबे समय से प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में कार्य कर रहे शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद ने प्रभारी प्रधानाध्यापकों को स्थायी प्रधानाध्यापक के वेतनमान एवं अनुमन्य परिलब्धियां दिए जाने के संबंध में स्थिति स्पष्ट की है। परिषद की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि निर्धारित अर्हताएं पूरी करने वाले प्रभारी प्रधानाध्यापकों को केवल इस आधार पर लाभ से वंचित नहीं किया जाना चाहिए कि वे किसी रिट याचिका में याची नहीं रहे हैं।
हाईकोर्ट के फैसले के आधार पर निर्देश
परिषद का यह स्पष्टीकरण इलाहाबाद हाईकोर्ट/लखनऊ खंडपीठ के स्पेशल अपील संख्या 652/2025, यूपी बेसिक एजुकेशन बोर्ड बनाम त्रिपुरारी दुबे एवं अन्य में 30 अप्रैल 2025 को दिए गए निर्णय के अनुपालन के क्रम में सामने आया है।
इसके अलावा शासन स्तर से भी इस संबंध में शासनादेश संख्या 68-5005(002)/93/2025-अनुभाग-5 (बेसिक शिक्षा), दिनांक 14 अक्टूबर 2025 जारी किया जा चुका है।
5 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले प्रभारी प्रधानाध्यापक पात्र
निर्देश के अनुसार उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत ऐसे प्रभारी/इंचार्ज प्रधानाध्यापक, जिन्होंने प्रभारी प्रधानाध्यापक के पद पर न्यूनतम पांच वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, निर्धारित शर्तों के अधीन इस लाभ के पात्र होंगे।
इससे उन शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है जो लंबे समय से विद्यालयों में प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, लेकिन उन्हें स्थायी प्रधानाध्यापक के अनुरूप वेतनमान एवं परिलब्धियां नहीं मिल पा रही थीं।
केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा लाभ
परिषद के पत्र में समानता के अधिकार को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। स्पष्ट किया गया है कि न्यायालय में रिट याचिका दाखिल करने वाले शिक्षकों तक ही लाभ सीमित रखना उचित नहीं होगा।
यदि कोई शिक्षक किसी रिट याचिका में याची नहीं बन पाया है, लेकिन वह सभी निर्धारित अर्हताएं पूरी करता है, तो उसके साथ केवल इस आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। ऐसे पात्र शिक्षकों को भी समान अवसर और नियमानुसार लाभ दिया जाना चाहिए।
प्रभारी प्रधानाध्यापकों में बढ़ी उम्मीद
परिषद के इस स्पष्टीकरण से प्रदेश के उन प्रभारी प्रधानाध्यापकों को बड़ी राहत की उम्मीद है, जिन्होंने पांच वर्ष या उससे अधिक समय तक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक का दायित्व निभाया है। अब पात्र शिक्षकों के वेतनमान एवं अनुमन्य परिलब्धियों के संबंध में विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
महत्वपूर्ण: वेतनमान का लाभ पाने के लिए संबंधित शिक्षक का निर्धारित अर्हताओं को पूरा करना आवश्यक होगा। इसलिए शिक्षकों को विभागीय आदेश एवं अपने सेवा अभिलेखों के आधार पर पात्रता की पुष्टि करनी चाहिए।


सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म