Type Here to Get Search Results !

सेवानिवृत्ति के छह महीने बाद वेतन की वसूली नहीं : हाई कोर्ट

Sir Ji Ki Pathshala

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारी से गलत वेतन निर्धारण के कारण हुए अधिक भुगतान की वसूली के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कर्मचारी की ओर से कोई गलती या धोखाधड़ी नहीं की गई है, तो सेवानिवृत्ति के छह महीने बाद अधिक भुगतान की वसूली का आदेश जारी नहीं किया जा सकता।

जस्टिस राकेश मोहन पांडेय ने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त स्टोर कीपर कोमल प्रसाद राठौर को राहत देते हुए उनके खिलाफ जारी दो वसूली आदेशों को निरस्त कर दिया। इन दोनों आदेशों के तहत कुल 4,26,911 रुपये की वसूली की जानी थी।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट न्यूज

कोमल प्रसाद राठौर की नियुक्ति 18 नवंबर 1983 को हुई थी और वे 30 जून 2020 को सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद विश्वविद्यालय ने 5 जनवरी 2021 को 1,10,923 रुपये की वसूली का आदेश जारी किया। बाद में 23 सितंबर 2021 को 3,15,988 रुपये की दूसरी वसूली भी निर्धारित की गई।

हाई कोर्ट ने कहा कि दोनों वसूली आदेश कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के छह महीने से अधिक समय बाद जारी किए गए थे। साथ ही, वेतन में अधिक भुगतान कर्मचारी की किसी गलती या धोखाधड़ी के कारण नहीं हुआ था। ऐसी स्थिति में सेवानिवृत्त कर्मचारी से अतिरिक्त भुगतान की वसूली करना उचित नहीं है।

कोर्ट ने इस मामले में नियम 66 के प्रावधानों पर भी विचार किया और सुप्रीम कोर्ट के रफीक मसीह मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया। कोर्ट ने माना कि संबंधित परिस्थितियों में सेवानिवृत्त कर्मचारी से इस प्रकार की वसूली कानूनन स्वीकार्य नहीं है।

हाई कोर्ट ने दोनों रिकवरी आदेशों को रद्द करते हुए निर्देश दिया कि यदि कर्मचारी से वसूली की कोई राशि पहले ही जमा कराई जा चुकी है, तो उसे वापस किया जाए। इस फैसले से उन सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राहत मिल सकती है, जिनसे विभागीय स्तर पर वेतन निर्धारण में हुई गलती के कारण अतिरिक्त भुगतान की वसूली की जा रही है।

Top Post Ad

Bottom Post Ad