उत्तर प्रदेश के नगर क्षेत्र के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में 11,508 सहायक अध्यापकों की भर्ती को लेकर शिक्षामित्रों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। भर्ती के विज्ञापन में शिक्षामित्रों को भारांक दिए जाने का स्पष्ट उल्लेख नहीं होने के बाद अब इस मुद्दे पर दोबारा विचार की प्रक्रिया शुरू हुई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को इस संबंध में पत्र भेजा गया है और आयोग ने मामले पर विचार के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की है।
दरअसल, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने बेसिक शिक्षा विभाग के नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालयों में 11,508 सहायक अध्यापक पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया है। यह भर्ती 2026 में शुरू हुई शिक्षक भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग के विज्ञापन में शिक्षामित्रों को 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु तक आवेदन के लिए पात्र बताया गया है, लेकिन उनके अनुभव के आधार पर भारांक दिए जाने का स्पष्ट प्रावधान विज्ञापन में दिखाई नहीं देता। इसी को लेकर शिक्षामित्र संगठनों की ओर से सवाल उठाए गए हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने शिक्षा सेवा चयन आयोग के सचिव मनोज कुमार को पत्र भेजकर सुप्रीम कोर्ट के 18 नवंबर 2020 के आदेश की जानकारी दी है। यह मामला राम शरण मौर्य से संबंधित था, जिसमें शीर्ष अदालत ने शिक्षामित्रों को आगे की शिक्षक चयन प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा करने का एक और अवसर देने की बात कही थी। अदालत ने इस अवसर को किस प्रक्रिया और व्यवस्था के तहत लागू किया जाए, इसे राज्य सरकार के विवेक पर छोड़ा था।
इस पत्र के बाद आयोग ने मामले का परीक्षण करने के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की है। अब समिति उपलब्ध न्यायिक आदेशों, शासन के निर्णयों और भर्ती से संबंधित नियमों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगी। इसके बाद आयोग के स्तर पर आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
शिक्षामित्रों के भारांक का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले 68,500 और 69,000 सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रियाओं में शिक्षामित्रों को उनके अनुभव के आधार पर भारांक का लाभ मिला था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इन भर्तियों में शिक्षामित्रों को अनुभव के आधार पर 10 से 25 अंक तक भारांक दिया गया था। इसी वजह से वर्तमान 11,508 भर्ती में भी शिक्षामित्र भारांक की मांग कर रहे हैं।
हालांकि, मौजूदा भर्ती में भारांक मिलेगा या नहीं, इस संबंध में अभी अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। इसलिए शिक्षामित्र अभ्यर्थियों को किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से जारी आधिकारिक निर्णय या संशोधित विज्ञापन का इंतजार करना चाहिए।
इस भर्ती में केवल भारांक ही नहीं, बल्कि चयन प्रक्रिया को लेकर भी अलग-अलग सवाल सामने आए हैं। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, आयोग के विज्ञापन में चयन लिखित परीक्षा के आधार पर करने की व्यवस्था बताई गई है, जबकि बेसिक शिक्षा (शिक्षक) सेवा नियमावली, 1981 में शैक्षिक मेरिट से जुड़े प्रावधान को लेकर भी चर्चा चल रही है। इस विषय पर आयोग की ओर से यह कहा गया है कि चयन प्रक्रिया निर्धारित करना परीक्षा कराने वाली संस्था के अधिकार क्षेत्र में है।
शिक्षामित्रों के भारांक को लेकर अब अगला महत्वपूर्ण कदम चार सदस्यीय समिति की रिपोर्ट और उसके बाद आयोग के निर्णय का होगा। यदि नियमों और न्यायालय के आदेशों के आधार पर कोई संशोधन या स्पष्टीकरण जारी किया जाता है तो उसका असर 11,508 सहायक अध्यापक भर्ती की चयन प्रक्रिया पर पड़ सकता है।


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