लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत तदर्थ एवं अल्पकालिक शिक्षकों की पेंशन से जुड़े मामलों को लेकर महत्वपूर्ण शासनादेश जारी किया है। माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-5 द्वारा जारी आदेश में सभी सक्षम अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि लंबित पेंशन प्रकरणों का निस्तारण उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों तथा संशोधित पेंशन नियमावली के अनुसार किया जाए।
शासन के अनुसार वर्ष 2000 से पूर्व नियुक्त वे तदर्थ शिक्षक, जिनकी सेवाएं उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम, 1982 की धारा 33-छ के अंतर्गत 22 मार्च 2016 से नियमित की गई थीं, उनके पेंशन संबंधी मामलों में कई याचिकाएं न्यायालय में लंबित थीं। इन मामलों में न्यायालय द्वारा दिए गए आदेशों के अनुपालन में अब सभी प्रकरणों की दोबारा समीक्षा कर निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं।
शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि 12 दिसंबर 2023 को संशोधित पेंशन नियमावली में जोड़े गए प्रावधानों के अनुसार धारा 33-छ के अंतर्गत नियमित किए गए शिक्षकों की अर्हकारी सेवा 22 मार्च 2016 से ही मानी जाएगी। इससे पहले की तदर्थ सेवा अवधि को पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा में शामिल नहीं किया जाएगा।
सरकार ने यह भी कहा है कि विभिन्न न्यायालयों के आदेशों के कारण कई मामलों में अलग-अलग स्तर पर भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। इसलिए अब सभी सक्षम अधिकारी न्यायालय के निर्णयों और वर्तमान संशोधित नियमावली को ध्यान में रखते हुए विस्तृत (Speaking Order) जारी करते हुए प्रत्येक मामले का निस्तारण करें, ताकि भविष्य में अनावश्यक विवाद और अवमानना जैसी स्थिति उत्पन्न न हो।
शासन ने निर्देश दिया है कि सभी लंबित पेंशन प्रकरणों का परीक्षण वर्तमान नियमों के अनुरूप किया जाए और निर्णय स्पष्ट कारणों के साथ पारित किए जाएं। यदि किसी अधिकारी द्वारा शासनादेश का पालन नहीं किया जाता है या अनावश्यक विलंब किया जाता है, तो उसके विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
यह आदेश प्रदेश के सभी संयुक्त शिक्षा निदेशकों, उप शिक्षा निदेशकों तथा जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को तत्काल अनुपालन के लिए भेज दिया गया है।
आदेश की मुख्य बातें
- वर्ष 2000 से पूर्व नियुक्त तदर्थ शिक्षकों की पेंशन से जुड़े मामलों पर नया शासनादेश जारी।
- धारा 33-छ के तहत 22 मार्च 2016 से नियमित हुए शिक्षकों के मामलों पर लागू होगा आदेश।
- पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा 22 मार्च 2016 से ही मानी जाएगी।
- नियमितीकरण से पूर्व की तदर्थ सेवा अवधि पेंशन में शामिल नहीं होगी।
- लंबित पेंशन प्रकरणों का न्यायालय के आदेशों एवं संशोधित नियमावली के अनुसार पुनः निस्तारण होगा।
- सभी मामलों में कारणयुक्त (Speaking Order) पारित करने के निर्देश।
- आदेश की अवहेलना या लापरवाही पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई होगी।



