चंदौली। विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) चंदौली ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार किसी भी विद्यालय में बच्चों को शारीरिक दंड, मानसिक उत्पीड़न, अपमानजनक व्यवहार या किसी भी प्रकार की प्रताड़ना देना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
बीएसए द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि RTE Act, 2009 की धारा 17 के तहत किसी भी छात्र को शारीरिक दंड या मानसिक उत्पीड़न नहीं दिया जा सकता। आदेश में कहा गया है कि छात्र को थप्पड़ मारना, डंडे या छड़ी से पीटना, मुर्गा बनाना, धूप में खड़ा करना, गाली-गलौज करना या किसी भी प्रकार का अपमानजनक व्यवहार करना दंडनीय अपराध माना जाएगा।
शिक्षक के साथ प्रधानाध्यापक भी होंगे जिम्मेदार
यदि किसी विद्यालय में इस प्रकार की घटना सामने आती है, तो केवल संबंधित शिक्षक ही नहीं बल्कि प्रधानाध्यापक/प्रभारी प्रधानाध्यापक को भी जिम्मेदार माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित शिक्षक एवं प्रधानाध्यापक के विरुद्ध निलंबन, एफआईआर और आवश्यकता पड़ने पर सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई की जा सकती है।
निजी एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों पर भी लागू होंगे निर्देश
बीएसए ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश केवल परिषदीय विद्यालयों तक सीमित नहीं है। सहायता प्राप्त एवं मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में भी यदि किसी छात्र के साथ शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न की घटना होती है, तो संबंधित शिक्षक के साथ विद्यालय प्रबंधन के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
घटना की सूचना देना होगा अनिवार्य
आदेश में कहा गया है कि यदि किसी छात्र के साथ उत्पीड़न की घटना होती है, तो विद्यालय प्रशासन को तत्काल संबंधित अधिकारियों, पुलिस एवं चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचना देनी होगी। घटना छिपाने या दबाने की स्थिति में भी जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
विद्यालयों में होगी नियमित निगरानी
बीएसए ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को विद्यालयों का नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रत्येक विद्यालय में शिकायत पेटी लगाने तथा विद्यार्थियों को उनके अधिकारों और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया से अवगत कराने को भी कहा गया है।
आदेश के बावजूद कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
हाल ही में हाजीपुर प्राथमिक विद्यालय में एक छात्र के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आने के बाद इन निर्देशों की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। यदि ऐसे मामलों में समयबद्ध कार्रवाई नहीं होती, तो सख्त आदेश केवल कागजों तक सीमित रह जाने की आशंका बनी रहती है।
विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में आवश्यक है कि जारी निर्देशों का कड़ाई से पालन कराया जाए और दोषियों के विरुद्ध बिना किसी भेदभाव के नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।



