होम बेस्ड एजुकेशन के लिए 322 गंभीर दिव्यांग बच्चों को मिलेगा लर्निंग मटेरियल, राज्य परियोजना निदेशक ने जारी किए निर्देश
लखनऊ। समग्र शिक्षा के अंतर्गत वर्ष 2026-27 में होम बेस्ड एजुकेशन (Home Based Education) कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय ने सभी संबंधित जिलों के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस योजना का उद्देश्य ऐसे गंभीर रूप से बहु-दिव्यांग बच्चों तक शिक्षा पहुंचाना है, जो अपनी दिव्यांगता के कारण विद्यालय आने में असमर्थ हैं।
होम बेस्ड एजुकेशन के लिए जारी हुआ बजट
भारत सरकार के प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (PAB) द्वारा समग्र शिक्षा के तहत होम बेस्ड एजुकेशन मद में ₹11.27 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई है। इस राशि से 322 गंभीर रूप से बहु-दिव्यांग बच्चों के लिए प्रति छात्र ₹3,500 की दर से लर्निंग मटेरियल एवं आवश्यक स्टेशनरी उपलब्ध कराई जाएगी।
बच्चों की आवश्यकता के अनुसार मिलेगा लर्निंग मटेरियल
जारी निर्देशों के अनुसार प्रत्येक बच्चे की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए लर्निंग मटेरियल उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें शैक्षणिक सामग्री, पजल, चित्र कार्ड, वर्णमाला एवं संख्या कार्ड, फ्लैश कार्ड, संवेदी (Sensory) सामग्री, दैनिक जीवन कौशल से जुड़ी सामग्री तथा अन्य शिक्षण उपकरण शामिल किए जाएंगे।
स्पेशल एजुकेटर करेंगे घर-घर जाकर सहयोग
होम बेस्ड एजुकेशन के अंतर्गत स्पेशल एजुकेटर गंभीर दिव्यांग बच्चों के घर जाकर शिक्षण-प्रशिक्षण देंगे। साथ ही बच्चों को उपलब्ध कराई गई सामग्री के उपयोग और रखरखाव के संबंध में अभिभावकों एवं विद्यालय के नोडल शिक्षक को भी आवश्यक जानकारी देंगे।
प्रेरणा पोर्टल पर होगा पूरा रिकॉर्ड
निर्देशों में कहा गया है कि लर्निंग मटेरियल उपलब्ध कराने से पहले बच्चों का प्रेरणा पोर्टल पर पंजीकरण किया जाएगा। सामग्री वितरण के बाद उसकी फोटो और विवरण भी पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इसके अलावा वितरण का अलग रजिस्टर तैयार किया जाएगा, जिसमें अभिभावक के हस्ताक्षर एवं मोबाइल नंबर भी दर्ज किए जाएंगे।
14 अगस्त तक सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश
राज्य परियोजना निदेशक ने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए 14 अगस्त 2026 तक सभी पात्र बच्चों को लर्निंग मटेरियल उपलब्ध कराया जाए। साथ ही वित्तीय नियमों एवं समग्र शिक्षा के दिशा-निर्देशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
इस पहल का उद्देश्य गंभीर रूप से बहु-दिव्यांग बच्चों को घर पर ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ना और उनकी सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी एवं सुलभ बनाना है।







