पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर केंद्र सरकार ने लोकसभा में स्थिति स्पष्ट कर दी है। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने बताया कि सरकारी राजकोष पर पुरानी पेंशन योजना की अनफंडेड देनदारी को देखते हुए इसे दोबारा लागू करने का कोई प्रस्ताव फिलहाल भारत सरकार के पास विचाराधीन नहीं है।
लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में वित्त मंत्रालय के राज्य मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार पुरानी पेंशन योजना को लागू करने पर विचार नहीं कर रही है। इसके पीछे मुख्य कारण सरकारी खजाने पर पड़ने वाली दीर्घकालिक वित्तीय देनदारी को बताया गया है।
सरकार की ओर से यह भी जानकारी दी गई कि कुछ राज्यों ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) से पुरानी पेंशन योजना में वापस जाने का निर्णय लिया है। 26 जुलाई 2026 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में NPS के तहत जमा पेंशन निधि से संबंधित आंकड़े सामने रखे गए हैं।
राजस्थान में करीब 53,403.89 करोड़ रुपये, छत्तीसगढ़ में 24,030.04 करोड़ रुपये, झारखंड में 14,420.90 करोड़ रुपये, पंजाब में 40,673.08 करोड़ रुपये और हिमाचल प्रदेश में 12,525.96 करोड़ रुपये की पेंशन निधि बताई गई है।
वित्त मंत्रालय ने यह भी बताया कि PFRDA अधिनियम, 2013 और संबंधित नियमों के तहत अभिदाताओं के संचित कॉर्पस यानी सरकारी अंशदान और कर्मचारियों के अंशदान के साथ उपार्जित आय को वापस करने तथा राज्य सरकार को वापस जमा करने से संबंधित प्रावधान मौजूद हैं।


