लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा के तृतीय सत्र 2026 में वित्तविहीन मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की सेवा शर्तों, मानदेय और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर सरकार से महत्वपूर्ण प्रश्न पूछा गया। सरकार ने अपने उत्तर में स्पष्ट किया कि फिलहाल नई नीति या नई सेवा नियमावली बनाने पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है।
विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने बताया कि वित्तविहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों की सेवा शर्तें 10 अगस्त 2001 के शासनादेश के अनुसार निर्धारित हैं।
सरकार ने कहा कि शासनादेश के तहत अंशकालिक अध्यापकों को प्रबंधतंत्र अपने निजी स्रोतों से नियमित रूप से पारिश्रमिक का भुगतान करेगा, जो न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत निर्धारित मजदूरी से कम नहीं होगा।
इसके अलावा शासनादेश में यह भी प्रावधान है कि प्रबंधतंत्र अंशकालिक शिक्षकों के लिए भविष्य निधि (PF) और जीवन बीमा (Life Insurance) जैसी योजनाएं लागू करेगा, जिसमें नियोजक का अंशदान भी प्रबंधतंत्र अपने निजी स्रोतों से वहन करेगा।
हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया कि सम्मानजनक मानदेय, स्थायी सेवा शर्तें, ईपीएफ, चिकित्सा सुविधा और अन्य सामाजिक सुरक्षा के लिए अलग से कोई नई नीति फिलहाल प्रस्तावित नहीं है।
मुख्य बातें
- वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए नई नीति बनाने से सरकार का इनकार।
- सेवा शर्तें 10 अगस्त 2001 के शासनादेश के अनुसार लागू।
- पारिश्रमिक न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के प्रावधानों से कम नहीं होगा।
- PF और जीवन बीमा की व्यवस्था प्रबंधतंत्र द्वारा अपने निजी स्रोतों से की जाएगी।
- सम्मानजनक मानदेय एवं अन्य सुविधाओं के लिए फिलहाल नई सेवा नियमावली पर कोई विचार नहीं।


