प्रयागराज: उत्तर प्रदेश की टीजीटी (प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक) अंग्रेजी विषय की भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। परीक्षा में पूछे गए कुछ प्रश्नों की वैधता और सिलेबस से बाहर प्रश्न पूछे जाने के आरोपों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड से विस्तृत जवाब तलब किया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने प्रयागराज निवासी आदित्य कुमार सिंह सहित 18 अभ्यर्थियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि टीजीटी अंग्रेजी परीक्षा में कई ऐसे प्रश्न पूछे गए हैं जो या तो तथ्यात्मक रूप से गलत हैं अथवा निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुरूप नहीं हैं।
याचिका में कहा गया है कि प्रश्नपत्र के प्रश्न संख्या 3, 11, 12 और 100 में गंभीर त्रुटियां हैं। इसके अलावा कुल 37 प्रश्न ऐसे हैं जो निर्धारित सिलेबस से बाहर पूछे गए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि इस प्रकार के प्रश्नों के कारण परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित हुई है और सभी उम्मीदवारों के साथ समान अवसर का सिद्धांत भी प्रभावित हुआ है।
सुनवाई के दौरान चयन बोर्ड की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए समय देने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि याचिका में उठाए गए सभी बिंदुओं पर सक्षम अधिकारियों से आवश्यक जानकारी प्राप्त की जाएगी। संबंधित प्रश्नों की जांच के बाद बोर्ड अपना विस्तृत पक्ष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेगा।
दलीलों को सुनने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चयन बोर्ड को आवश्यक निर्देश प्राप्त कर अपना जवाब दाखिल करने का समय प्रदान किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बोर्ड का जवाब प्राप्त होने के बाद मामले की अगली सुनवाई में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस याचिका के कारण टीजीटी अंग्रेजी भर्ती परीक्षा में शामिल हजारों अभ्यर्थियों की नजर अब हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हुई है। यदि अदालत याचिकाकर्ताओं के दावों को सही पाती है, तो प्रश्नों के मूल्यांकन, परिणाम या अन्य आवश्यक प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया जा सकता है। हालांकि अंतिम फैसला चयन बोर्ड के जवाब और सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ही किया जाएगा।


