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TET अनिवार्यता को लेकर शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी का लोकसभा में जवाब

Sir Ji Ki Pathshala

नई दिल्ली। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर लोकसभा में पूछे गए अतारांकित प्रश्न संख्या-212 के जवाब में शिक्षा मंत्रालय ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने स्पष्ट किया कि TET, शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के तहत शिक्षक बनने के लिए अनिवार्य न्यूनतम योग्यता है और इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का पालन किया जा रहा है।

लोकसभा में सांसद ने सरकार से पूछा कि क्या TET अनिवार्य होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर इसके प्रभाव का आकलन किया गया है, क्या उन्हें राहत देने के लिए कानून में संशोधन पर विचार किया जा रहा है तथा क्या TET नियमित रूप से आयोजित कराने की व्यवस्था की जाएगी।

सरकार ने अपने उत्तर में कहा कि शिक्षकों की भर्ती और सेवा शर्तें राज्यों के अधिकार क्षेत्र का विषय हैं। इसलिए TET लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों की संख्या का अलग से रिकॉर्ड केंद्र सरकार के पास उपलब्ध नहीं है। संबंधित आंकड़ों का रखरखाव राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश करते हैं।

शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने 1 सितंबर 2025 के अपने निर्णय में स्पष्ट किया था कि RTE अधिनियम की धारा 23 के तहत TET शिक्षक नियुक्ति के लिए अनिवार्य योग्यता है। इसके बाद समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 29 मई 2026 के आदेश में कोर्ट ने TET योग्यता प्राप्त करने की अंतिम समय-सीमा 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि संबंधित सरकारें और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियां प्रत्येक वर्ष कम से कम दो बार, लगभग छह-छह महीने के अंतराल पर TET आयोजित कराने का प्रयास करें, ताकि योग्य अभ्यर्थियों को निर्धारित न्यूनतम अर्हता प्राप्त करने का पर्याप्त अवसर मिल सके।

इस उत्तर से स्पष्ट है कि TET शिक्षक नियुक्ति के लिए अनिवार्य पात्रता बनी रहेगी। पात्रता प्राप्त करने की समय-सीमा अब 31 अगस्त 2028 तक बढ़ा दी गई है तथा राज्यों और परीक्षा एजेंसियों को वर्ष में दो बार TET आयोजित कराने का प्रयास करने की सलाह दी गई है। हालांकि, पुराने नियुक्त शिक्षकों को लेकर किसी नई कानूनी राहत या RTE अधिनियम में संशोधन की घोषणा नहीं की गई है।

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