नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि "खेल के बीच में नियम नहीं बदले जा सकते।" शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में वर्ष 2014-15 की प्रशिक्षक भर्ती से जुड़े मामले में कहा कि चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों या कटऑफ में बदलाव करना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर नए सिरे से विचार करने के निर्देश दिए हैं।
भर्ती प्रक्रिया के बीच नियम बदलना गलत
जस्टिस दीपांकर दत्ता और एजी मसीह की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि जिस प्रकार किसी खेल के दौरान उसके नियम नहीं बदले जा सकते, उसी प्रकार भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद चयन समिति भी नियमों या कटऑफ अंकों में बदलाव नहीं कर सकती। ऐसा करना चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता के खिलाफ है।
अदालत ने कहा कि भर्ती के दौरान नियम बदलने से बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित होते हैं और पूरी चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो जाते हैं।
पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर करें विचार
सुप्रीम कोर्ट ने चयन समिति और संबंधित सोसायटी को निर्देश दिया है कि वे पात्र अभ्यर्थियों के मामलों पर दोबारा विचार करें और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में रिक्त प्रशिक्षक पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाएं।
पीठ ने यह भी कहा कि संबंधित अधिकारी अदालत के आदेश की प्रति प्राप्त होने के दो सप्ताह के भीतर सक्षम प्राधिकारी के समक्ष आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ थीं अपीलें
यह फैसला सुप्रीम कोर्ट ने 24 जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ दायर कई अपीलों पर सुनवाई करते हुए सुनाया। अदालत ने माना कि इस मामले में राज्य की कार्रवाई मनमानीपूर्ण रही, जिससे कई पात्र अभ्यर्थियों का चयन प्रभावित हुआ।
निष्पक्ष भर्ती पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि चयन प्रक्रिया का उद्देश्य योग्य अभ्यर्थियों का निष्पक्ष चयन करना होता है। यदि प्रक्रिया के बीच नियम या कटऑफ बदल दिए जाएं तो इससे समान अवसर का सिद्धांत प्रभावित होता है। इसलिए भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद किसी भी प्रकार का बदलाव स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण फैसला
यह निर्णय केवल आईटीआई प्रशिक्षक भर्ती तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि भविष्य की सभी सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत स्थापित करता है। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि चयन प्रक्रिया के दौरान नियम बदलकर योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों या कटऑफ में बदलाव करना उचित नहीं है। साथ ही, पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश देकर न्यायसंगत चयन प्रक्रिया को प्राथमिकता दी है।


